CPM नेता सीताराम येचुरी का निधन, परिवार ने अस्पताल को बॉडी डोनेट की

नई दिल्ली। 72 साल की उम्र में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी का निधन हो गया। 25 दिन पहले उन्हें निमोनिया की शिकायत के बाद दिल्ली AIIMS में भर्ती कराया गया था। उनकी मृत्यु के बाद CPI(M) ने बयान जारी कर बताया कि सीताराम येचुरी को सांस की नली में गंभीर संक्रमण हुआ था। परिवार ने अस्पताल को सीताराम येचुरी की बॉडी डोनेट करने का फैसला किया है। बता दें कि वह 2014 से ही पार्टी के महासचिव थे। वह अपनी पार्टी से दो बार (2005-2017) राज्यसभा सांसद भी रहे।
अस्पताल द्वारा जारी बयान...
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने X पर लिखा- सीताराम येचुरी के मृत्यु की खबर सुन दुखी हूं। उनका निधन देश की राजनीति के लिए गहरी क्षति है। वह एक अनुभवी सांसद थे। उनके परिवार, सहकर्मियों और मित्रों के प्रति मैं अपनी संवेदना व्यक्त करती हूं।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा- सीताराम येचुरी के निधन की खबर सुन बहुत दुखी हूं। वह कम्युनिस्ट आंदोलन के एक साहसी नेता थे। राजनीतिक सफर में छात्र आंदोलन से लेकर उन्होंने 9 साल तक पार्टी के महासचिव का पद संभाला। वो भी ऐसे समय पर जब पार्टी कठिन राजनीतिक दौर से गुजर रही थी। जब देश में लोग गंभीर संकटों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में सीताराम येचुरी का हम सबके बीच न होना देश के लिए अपूर्णीय क्षति है। वह भारतीय राजनीति के सच्चे मार्गदर्शक थे।
नेताओं ने सीताराम येचुरी को दी श्रद्धांजलि
सीताराम येचुरी के निधन पर शोक जताते हुए कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने लिखा- सीताराम येचुरी मेरे दोस्त थे। जो इस देश की गहरी समझ रखते थे और ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ के रक्षक थे। उनके साथ किए गए लंबे चर्चे याद आएंगे। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार और मित्रों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने X पर लिखा- सीताराम येचुरी के मृत्यु की खबर सुन दुखी हूं। उनका निधन देश की राजनीति के लिए गहरी क्षति है। वह एक अनुभवी सांसद थे। उनके परिवार, सहकर्मियों और मित्रों के प्रति मैं अपनी संवेदना व्यक्त करती हूं।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा- सीताराम येचुरी के निधन की खबर सुन बहुत दुखी हूं। वह कम्युनिस्ट आंदोलन के एक साहसी नेता थे। राजनीतिक सफर में छात्र आंदोलन से लेकर उन्होंने 9 साल तक पार्टी के महासचिव का पद संभाला। वो भी ऐसे समय पर जब पार्टी कठिन राजनीतिक दौर से गुजर रही थी। जब देश में लोग गंभीर संकटों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में सीताराम येचुरी का हम सबके बीच न होना देश के लिए अपूर्णीय क्षति है। वह भारतीय राजनीति के सच्चे मार्गदर्शक थे।





















