
सीहोर। तिरुपति मंदिर में लड्डुओं का विवाद थमा नहीं था कि मध्य प्रदेश में वैसा ही एक विवाद शुरू हो गया है। सीहोर जिले के प्रसिद्ध सलकनपुर देवी धाम में बेचे जाने वाले लड्डुओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मंदिर ट्रस्ट ने कलेक्टर और एसपी को पत्र लिखकर मामले की शिकायत की है। आरोप है कि इन लड्डुओं से अजीब गंध आ रही है। देवी धाम में प्रसाद के तौर पर बेचे जाने वाले इन लड्डुओं की गुणवत्ता को लेकर अब ट्रस्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इसको लेकर भक्तों ने पहले भी शिकायत की थी।
आजीविका मिशन के अंतर्गत बनते हैं लड्डू
इन लड्डुओं को महिला स्व-सहायता समूह द्वारा मध्य प्रदेश आजीविका मिशन के अंतर्गत तैयार किया जाता है। यहां 2021 से लड्डुओं को बेचा जा रहा है। इस समूह की एक सदस्य रजनी ने बताया कि वे प्रसाद को पूरी शुद्धता और ईमानदारी से तैयार करते हैं। इसके लिए हमने फूड एनालिस्ट का सर्टिफिकेट भी लिया है। उनका कहना है कि अगर यह केंद्र बंद हो गया तो आजीविका मिशन की कई बहनों को आर्थिक नुकसान होगा। मंदिर ट्रस्ट की तरफ से दुकान बंद करने को कहा गया है।
प्रसाद की गुणवत्ता पर ट्रस्ट ने जताई नाराजगी
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश उपाध्याय का कहना है कि कई श्रद्धालुओं ने लड्डुओं से आ रही गंध के बारे में शिकायत की है। इसके चलते ट्रस्ट ने सीहोर कलेक्टर और पुलिस प्रशासन को पत्र लिखकर प्रसाद बेचने पर रोक लगाने की मांग की है। इसके अलावा, ट्रस्ट ने यह भी कहा है कि लड्डुओं की गुणवत्ता की गारंटी वे नहीं लेते हैं और प्रसाद पर मंदिर का लोगो नहीं लगाना चाहिए।
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने किया था शुभारंभ
लड्डू बनाने वाले केंद्र की शुरुआत 7 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। तब से यह केंद्र मंदिर परिसर में प्रसाद के तौर पर लड्डू बेचता आ रहा है। इस मामले में एसडीएम राधेश्याम बघेल ने बताया कि ट्रस्ट की मांग पर लड्डुओं की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी।
एसडीएम ने जांच का दिया आश्वासन
एसडीएम राधेश्याम बघेल ने बताया कि मंदिर ट्रस्ट की तरफ से पत्र लिखा, लड्डू की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। इसकी जांच खाद्य विभाग से कराई जाएगी। ट्रस्ट ने प्रशासन से पत्र लिखकर मंदिर प्रांगण में स्थित दुकानों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग की है।
तिरुपति से शुरू हुआ यह विवाद
सबसे पहले लड्डू को लेकर विवाद तिरुपति मंदिर में शुरू हुआ। तिरुपति मंदिर का विवाद तब शुरू हुआ, जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि तिरुपति मंदिर के प्रसादम लड्डू में घी के बजाय जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल किया गया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने पिछली सरकार पर श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया था।