
भोपाल। इमरजेंसी की बरसी के अगले दिन यानी 26 जून को एमपी सरकार ने आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों को कई नई सुविधाएं देने की घोषणा कर दी है। सीएम डॉ मोहन यादव ने इसके साथ ही अहम घोषणा करते हुए कहा कि अब आपातकाल को कोर्स में शामिल किया जाएगा और इस दौरान लोकतंत्र सेनानिय़ों (मीसाबंदियों) की संघर्ष गाथा विद्यार्थियों स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि आपातकाल के कष्टों से वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराने के लिए उस समय के हालात, दमन और लोकतंत्र सेनानियों की जीवटता को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
सीएम हाउस में हुआ सम्मेलन
मुख्यमंत्री ने सीएम हाउस में आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के प्रादेशिक सम्मेलन में पधारे लोकतंत्र सेनानियों का फूल बरसाकर स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निवास लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक हिस्सा है और लोकतंत्र सेनानी लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वाधिक सम्मानित व्यक्ति हैं।
लोकतंत्र सेनानियों को मिलेंगी अनेक सुविधाएं
इस दौरान सीएम ने प्रदेश के लोकतंत्र सेनानियों के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। अब लोकतंत्र सेनानियों को प्रदेश के सभी सर्किट हाउस और विश्राम गृह में तीन दिन तक रूकने की सुविधा मिलेगी और किराए में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसके अलावा जिन लोकतंत्र सेनानियों को अब तक ताम्रपत्र प्राप्त नहीं हुए हैं, उन्हें ताम्रपत्र प्रदान किये जाएंगे। इसके साथ ही अब लोकतंत्र सेनानियों को अपना पास दिखाने पर टोल टैक्स नहीं देना होगा।
सरकार उनके आयुष्मान कार्ड पर होने वाले इलाज की राशि तत्काल जारी करते हुए इलाज पर होने वाले अन्य खर्चों का 3 माह में भुगतान कर देगी। गंभीर रूप से बीमार लोकतंत्र सेनानिय़ों को अब बड़े अस्पताल या महानगर जाने के लिए एयर एंबुलेंस की सुविधा भी मिलेगा। लोकतंत्र सेनानियों को अब एयर टैक्सी के किराए में 25 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।
राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार
सीएम ने सम्मेलन में कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के निधन पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तरह राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि होगी और अंतिम संस्कार के लिए दी जाने वाली 8 हजार की राशि को भी बढ़ाकर 10 हजार किया जाएगा। इसके अलावा लोकतंत्र सेनानियों के परिजनों को उद्योग धंधे लगाने के लिए सरकार प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था करेगी। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों के अलावा मंत्री तुलसी सिलावट, पूर्व मंत्री विक्रम वर्मा, अजय विश्नोई और रामकृष्ण कुसमरिया भी शामिल हुए।
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