सौरव दास और आशुतोष रांका की आज हो सकती है रिहाई? SEM कोर्ट में याचिका; अभिजीत दीपके को पहले ही मिली जमानत

नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की गिरफ्तारी का मामला लगातार चर्चा में है। CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। दोनों फिलहाल 5 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं और आज उनकी रिहाई पर फैसला आने की संभावना है। वहीं, पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को पहले ही SEM कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। ऐसे में सबकी नजरें अब सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई से जुड़े फैसले पर टिकी हैं।
सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर नजरें
CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली में जंतर-मंतर क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोप में एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर प्रदर्शन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने और पुलिस के काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। अब दोनों की रिहाई के लिए SEM कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस पर अदालत का फैसला उनके आगे के कानूनी कदम तय करेगा। हालांकि, याचिका दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि रिहाई तय हो गई है।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ था, जिसके बाद गिरफ्तार हुए CJP नेता?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्य एक निजी परिसर के रास्ते जंतर-मंतर पहुंच गए थे। पुलिस का कहना है कि संबंधित स्थान को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। पुलिस के अनुसार, मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने सुरक्षा कर्मियों के काम में बाधा डाली। इसके बाद सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया। मामले में पुलिस ने सार्वजनिक शांति भंग करने और कानून का उल्लंघन करने की आशंका के आधार पर कार्रवाई की। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को एहतियातन गिरफ्तार किया गया।
CJP नेताओं पर किन आरोपों में दर्ज हुआ मामला?
प्रदर्शन से जुड़े मामले में पुलिस ने कई आरोप लगाए हैं। इनमें जबरन प्रवेश, निषेधाज्ञा का उल्लंघन, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए मुचलके की शर्तों का उल्लंघन और लोक सेवक को सरकारी कर्तव्य निभाने से रोकने जैसे आरोप शामिल हैं। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को एसईएम कोर्ट में पेश किया गया था। अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, अजिंक्य शिंदे को अलग शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। शिंदे को 6 महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की शर्त पर निजी मुचलके तथा 5,000 की जमानत राशि के आधार पर रिहाई मिली थी।
अभिजीत दीपके को कैसे मिली जमानत?
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को भी दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के दौरान हिरासत में लिया गया था। कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में एहतियातन गिरफ्तार किया। दीपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने की आशंका से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद SEM कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचने पर एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। उस समय भी शांति बनाए रखने से जुड़ी अलग कानूनी कार्रवाई की गई थी और उनसे एक साल तक शांति बनाए रखने के बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराए गए थे।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर था प्रदर्शन
CJP समर्थक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद की स्थिति बनी। प्रदर्शन की अनुमति, निर्धारित स्थल पर प्रवेश और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल इस मामले के अहम पहलू हैं। दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई को सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है, जबकि CJP नेताओं की रिहाई का मामला अब अदालत के सामने है।



















