Bollywood Celebrities Cyber Scam: बॉलीवुड के बड़े सितारे भी बने डिजिटल ठगी का शिकार, शोहरत नहीं बचा सकी लाखों रुपए का नुकसान!

कीर्ति कुल्हारी के क्रेडिट कार्ड से 2.44 लाख रुपए फ्रॉड से लेकर अंकुश बहुगुणा के डिजिटल अरेस्ट तक, जानें बॉलीवुड सितारों से जुड़े साइबर स्कैम और ऑनलाइन ठगी से बचने के तरीके।
Bollywood Celebrities Cyber Scam: बॉलीवुड के बड़े सितारे भी बने डिजिटल ठगी का शिकार, शोहरत नहीं बचा सकी लाखों रुपए का नुकसान!

बॉलीवुड के बड़े सितारों और लोकप्रिय सोशल मीडिया चेहरों की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दिखाई देती है, डिजिटल दुनिया में उनके सामने भी धोखाधड़ी का खतरा उतना ही वास्तविक है। अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी के क्रेडिट कार्ड से कथित तौर पर लाखों रुपए के अनधिकृत अंतरराष्ट्रीय लेनदेन से लेकर कंटेंट क्रिएटर अंकुश बहुगुणा के डिजिटल अरेस्ट स्कैम तक, कई मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं ने दिखाया है कि ऑनलाइन ठगी के लिए न तो किसी आम व्यक्ति को निशाना बनाना जरूरी है और न ही किसी की आर्थिक स्थिति को देखकर अपराधी अपना तरीका चुनते हैं। कभी क्रेडिट कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग होता है, तो कभी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराया जाता है। ऐसे में सवाल है कि जब मशहूर चेहरे भी साइबर ठगी से सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

कीर्ति कुल्हारी के क्रेडिट कार्ड से 2.44 लाख अनधिकृत लेनदेन

अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी से जुड़ा क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी का मामला डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है। हिंदुस्तान टाइम्स की 30 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कथित तौर पर विदेश में करीब 2.44 लाख रुपए के अनधिकृत लेनदेन के लिए किया गया। इस मामले में मुंबई पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस तरह की धोखाधड़ी में कार्डधारक को कई बार तब पता चलता है, जब मोबाइल पर बैंक का ट्रांजैक्शन अलर्ट आता है। यदि कार्ड की जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाए, तो वे उसका इस्तेमाल अनधिकृत भुगतान के लिए कर सकते हैं।

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इस घटना से तीन अहम सबक मिलते हैं-

  • क्रेडिट कार्ड के ट्रांजैक्शन अलर्ट हमेशा चालू रखें।
  • किसी भी अनजान भुगतान की जानकारी मिलते ही बैंक से संपर्क करें।
  • कार्ड की जानकारी, सीवीवी और ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

अंकुश बहुगुणा 40 घंटे तक रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम के दबाव में

सोशल मीडिया पर लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर अंकुश बहुगुणा ने जनवरी 2025 में अपने साथ हुई कथित डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी का अनुभव साझा किया था। उन्होंने बताया कि ठगों ने उन्हें करीब 40 घंटे तक मानसिक दबाव में रखा और इस दौरान उन्हें आर्थिक नुकसान भी हुआ। <sup>स्रोत</sup> अंकुश के मुताबिक, उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनका एक पार्सल रोक दिया गया है और उसमें अवैध सामान मिला है। इसके बाद ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें गंभीर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया।

पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने भी बताई आर्थिक धोखाधड़ी की परेशानी

टेलीविजन कलाकार पूजा बनर्जी और उनके पति कुणाल वर्मा से जुड़ा वित्तीय धोखाधड़ी का मामला भी चर्चा में रहा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दोनों ने अपनी बचत गंवाने और परिवार के लिए मुश्किल दौर आने की बात साझा की थी। इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि वित्तीय धोखाधड़ी का असर सिर्फ बैंक खाते तक सीमित नहीं रहता। मेहनत से जमा की गई बचत प्रभावित होने पर परिवार की योजनाओं, रोजमर्रा के खर्च और मानसिक शांति पर भी असर पड़ सकता है।

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राहुल सिंह तोमर के साथ 85 हजार रुपए की ठगी

टीवी अभिनेता राहुल सिंह तोमर से जुड़े मामले में एक अनजान व्यक्ति के फोन कॉल के बाद 85 हजार रुपए का नुकसान होने की जानकारी सामने आई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने अपना ओटीपी या यूपीआई पिन साझा नहीं किया था। यह मामला एक अहम सवाल उठाता है: क्या ओटीपी साझा किए बिना भी ऑनलाइन धोखाधड़ी हो सकती है? कुछ परिस्थितियों में ठग फर्जी लिंक, स्क्रीन-शेयरिंग ऐप, धोखाधड़ी वाले भुगतान अनुरोध या अन्य तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए केवल ओटीपी सुरक्षित रखना ही पर्याप्त नहीं है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप इंस्टॉल करना, स्क्रीन साझा करना या भुगतान मंजूर करना भी जोखिम पैदा कर सकता है।

फिल्मों में स्कैम की कहानी

'जामतारा: सबका नंबर आएगा', 'स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' और 'स्कैम 2003: द टेल्गी स्टोरी' जैसी सीरीज ने धोखाधड़ी के अलग-अलग रूपों को पर्दे पर दिखाया है। लेकिन वास्तविक जिंदगी में साइबर अपराध की सबसे बड़ी ताकत लोगों के डर, भरोसे और जल्दबाजी का फायदा उठाना है। ठग अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं- 

  • डिजिटल अरेस्ट स्कैम: पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाना।
  • क्रेडिट कार्ड फ्रॉड: कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग कर अनधिकृत भुगतान करना।
  • फिशिंग लिंक: बैंक या किसी विश्वसनीय कंपनी के नाम पर फर्जी लिंक भेजना।
  • यूपीआई फ्रॉड: पैसे मिलने का झांसा देकर पीड़ित से भुगतान मंजूर करवाना।
  • फर्जी निवेश स्कैम: कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर पैसे लेना।

साइबर अपराधी अक्सर अपने शिकार को तुरंत फैसला लेने के लिए दबाव में डालते हैं। यही वजह है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर रुककर जांच करना बेहद जरूरी है।

ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये 7 तरीके

अपनी डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें- 

  • ओटीपी और यूपीआई पिन गोपनीय रखें: बैंक या पुलिस के नाम पर फोन करने वाले व्यक्ति को भी ये जानकारी न दें।
  • अनजान लिंक पर क्लिक न करें: बैंकिंग या भुगतान से जुड़ी वेबसाइट का पता स्वयं टाइप करके खोलें।
  • स्क्रीन शेयरिंग से बचें: अनजान व्यक्ति के कहने पर रिमोट एक्सेस या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।
  • ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखें: खाते और कार्ड में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखें।
  • जल्दबाजी में पैसे न भेजें: किसी अधिकारी या रिश्तेदार के नाम पर आए आपातकालीन अनुरोध की पुष्टि करें।
  • संदिग्ध कॉल काट दें: खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित करें।
  • तुरंत शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर भारत की साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

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