
प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में आज से पक्षियों की गिनती और प्रजातियों का अध्ययन करने के लिए तीन दिवसीय सर्वेक्षण का आयोजन शुरू हो गया है। यह सर्वे 9 मार्च से शुरू होकर 11 मार्च तक चलेगा, जिसमें 11 राज्यों से 75 पक्षी विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस सर्वे का उद्देश्य सतपुड़ा के जंगलों में पाए जाने वाले पक्षियों की प्रजातियों की पहचान करना और उनकी संख्या का आकलन करना है।
2023 में 360 से अधिक प्रजातियों की पहचान
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की घनी और हरी-भरी वादियों में पक्षियों की दुर्लभ और विदेशी प्रजातियां पाई जाती हैं। पिछले वर्ष 2023 में हुए सर्वे में 360 से अधिक पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई थी। इस साल भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस संख्या में इज़ाफा होगा।
39 टीमों द्वारा किया जाएगा सर्वेक्षण
सर्वेक्षण के लिए 39 टीमों का गठन किया गया है, जो अलग-अलग इलाकों में जाकर पक्षियों की गिनती करेंगे। प्रत्येक दल हर दिन लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करेगा और रास्ते में मिलने वाले पक्षियों के फोटो और अन्य विवरण रिकॉर्ड करेगा। इस दौरान पक्षी विशेषज्ञ पक्षियों की आवाज़, प्रजातियां और उनके आवास के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे।
देशभर के विशेषज्ञ होंगे शामिल
इस सर्वेक्षण में देशभर के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, जिनमें मध्य प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, दिल्ली, झारखंड, हरियाणा और बिहार के वरिष्ठ पक्षी विशेषज्ञ शामिल हैं। सतपुड़ा के जंगलों में कई विदेशी पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जिन्हें इस सर्वे में शामिल किया जाएगा।
उच्च अधिकारियों की निगरानी में सर्वे
इस तीन दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा और उपसंचालक पूजा नागले सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मढ़ई में डेरा डालेंगे। एसडीओ अंकित जामोद ने कहा कि इस सर्वेक्षण से हम सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पक्षियों की वास्तविक संख्या और उनकी दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण में मदद कर सकेंगे।
जैव विविधता के संतुलन में मदद
सतपुड़ा के घने जंगलों में उड़ते रंग-बिरंगे परिंदों की गिनती न केवल उनकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जैव विविधता के संतुलन को बनाए रखने में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
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