
बिहार में धूमधाम से मनाए जाने वाला जितिया व्रत कई परिवारों के लिए मातम का कारण बन गया। इस पवित्र व्रत के दौरान नदियों और तालाबों में स्नान करते समय 37 बच्चों समेत 43 लोगों की डूबने से मौत हो गई। यह हादसा 24 और 25 सितंबर को राज्य के 15 जिलों में हुआ। घटना के बाद से पूरे बिहार में हाहाकार मच गया है। बिहार सरकार ने इस त्रासदी के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है।
बच्चों की लंबी उम्र के लिए जितिया पर्व
बिहार में जितिया व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत माएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख और स्वास्थ्य के लिए रखती हैं। 15 जिलों में पवित्र स्नान के दौरान नदियों और तालाबों में डूबने से 43 लोगों की जान चली गई, जिनमें 37 बच्चे और 7 महिलाएं शामिल थीं।
औरंगाबाद में सबसे ज्यादा मौतें
औरंगाबाद जिले में सबसे ज्यादा 10 मौतें हुई हैं। इसमें से 8 बच्चे दो अलग-अलग घटनाओं में डूब गए। ये हादसे बरुना और मदनपुर थाना क्षेत्रों के इटाहट और कुशहा गांवों में हुए। इसके अलावा कैमूर, मोतिहारी, सीवान और अन्य जिलों से भी डूबने की घटनाएं सामने आईं।
सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। सीएम ने मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की है।
राहत और बचाव कार्य जारी
जिले वार बात करें तो औरंगाबाद में 10, गोपालगंज में 1, छपरा में 5, भोजपुर में 1, रोहतास में 4, नालंदा में 1, कैमूर में 3, दरभंगा में 1, सीवान में 3, मधुबनी में 1, मोतिहारी में 3, समस्तीपुर में 1, बेतिया में 2, अरवल में 1, बेगूसराय में 2 और पटना में 4 लोगों की डूबने से मौत हो गई।
NDRF और SDRF की टीमें घटनास्थलों पर खोज और बचाव कार्य में जुटी हैं। तीन लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। बिहार सरकार इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।