कभी फीस भरने के पैसे नहीं थे, आज मंत्रालय में डायरेक्टर… छात्र की कामयाबी पर भावुक हुए आनंद सर

कहते हैं कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी आसान हो सकता है। इसकी एक प्रेरक मिसाल बिदुर कांत झा की कहानी है। कभी आर्थिक परेशानियों के कारण पढ़ाई जारी रखने में मुश्किलों का सामना करने वाले बिदुर आज भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी इस उपलब्धि को साझा करते हुए सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने गर्व जताया और करीब 30 साल पुरानी यादें ताजा कीं।
30 साल बाद छात्र का फोन आया तो ताजा हुईं पुरानी यादें
बिहार की राजधानी पटना में रहने वाले आनंद कुमार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों को IIT प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग और मार्गदर्शन देने के लिए जाने जाते हैं। उनके इसी सफर पर बॉलीवुड फिल्म सुपर 30 भी बनी थी, जिसमें अभिनेता ऋतिक रोशन ने उनकी भूमिका निभाई थी।
हाल ही में आनंद कुमार ने सोशल मीडिया पर अपने पूर्व छात्र बिदुर कांत झा की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि बिदुर का फोन आने पर करीब तीन दशक पुरानी यादें ताजा हो गईं। उस समय बिदुर की आंखों में बड़े सपने थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनके सामने पढ़ाई जारी रखने की चुनौती थी।

आनंद कुमार ने उस मुलाकात को याद करते हुए लिखा- आज मेरे पूर्व छात्र बिदुर कांत झा का फोन आया और 30 साल पुरानी यादें ताजा हो गईं। एक बार एक लड़का मेरी चौखट पर खड़ा था। उसकी आंखों में सपने थे, लेकिन पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। मैंने उससे कहा था, 'पैसों की चिंता मत करो, बस मेहनत करो।’
मेहनत के दम पर हासिल किया मुकाम
आर्थिक परेशानियों के बावजूद बिदुर कांत झा ने अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना जारी रखा। मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने अपनी पहचान बनाई और आज वह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
आनंद कुमार के लिए अपने पूर्व छात्र की यह उपलब्धि सिर्फ करियर में मिली सफलता नहीं है, बल्कि उस भरोसे का परिणाम भी है, जो उन्होंने वर्षों पहले अपने विद्यार्थी पर जताया था। उन्होंने इस बात पर भी खुशी जाहिर की कि इतने ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी बिदुर अपने पुराने दिनों और अपने शिक्षक को नहीं भूले।
‘यही एक शिक्षक का असली इनाम है’
अपने छात्र के साथ रिश्ते का जिक्र करते हुए आनंद कुमार ने लिखा- आज इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद उसने अपने पुराने शिक्षक को नहीं भुलाया है। यही एक शिक्षक का असली इनाम है! दो तस्वीरें, एक 30 साल पहले की और दूसरी आज की। वक्त बदल गया है, लेकिन रिश्ता आज भी वही है।
आनंद कुमार की यह बात शिक्षक और विद्यार्थी के बीच के उस रिश्ते को दिखाती है, जो समय बीतने और जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करने के बाद भी कायम रह सकता है। उनके मुताबिक, किसी शिक्षक के लिए उसके विद्यार्थी की सफलता और वर्षों बाद भी उसका अपने गुरु को याद रखना बेहद मायने रखता है।
शिक्षा और मार्गदर्शन से बदल सकती है जिंदगी
आनंद कुमार लंबे समय से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। सुपर 30 का उद्देश्य ऐसे छात्रों को अवसर देना है, जिनकी प्रतिभा संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह सकती है।
बिदुर कांत झा का सफर शिक्षा, मेहनत और सही मार्गदर्शन की अहमियत को सामने लाता है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि आर्थिक मुश्किलें रास्ते में बाधा बन सकती हैं, लेकिन अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर आगे बढ़ने की राह बनाई जा सकती है। वहीं, आनंद कुमार के लिए अपने विद्यार्थी को सफल होते देखना और उसका वर्षों बाद भी अपने गुरु के प्रति सम्मान बनाए रखना सबसे बड़ी खुशी है।




















