
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने अपनी संपत्ति की घोषणा को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। यह फैसला 1 अप्रैल को आयोजित पूर्ण अदालत की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने की। इस निर्णय का उद्देश्य न्यायपालिका में पारदर्शिता बढ़ाना और जनता का विश्वास मजबूत करना है।
सीजेआई संजीव खन्ना का निर्देश
बैठक में सीजेआई संजीव खन्ना ने सभी जजों को अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के निर्देश दिए। सभी जज सर्वसम्मति से अपनी संपत्ति की घोषणा सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने पर सहमत हुए। सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों के अनुसार, जल्द ही इस फैसले को लागू किया जाएगा।
पहले भी उठे थे ऐसे कदम
1997 में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय लिया था कि जजों को अपनी संपत्ति की घोषणा करनी चाहिए। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी इस पर सहमति दी थी। 2009 में सभी हाईकोर्ट ने इस फैसले का समर्थन किया, लेकिन इसे लागू करना मुश्किल साबित हुआ क्योंकि यह स्वैच्छिक था। अब, सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक बार फिर इसे लागू करने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि हाईकोर्ट के जज भी इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे।
क्या है पूरा मामला
7 मई 1997 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे एस वर्मा की अध्यक्षता में एक बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें कहा गया था कि सभी जजों को अपनी संपत्ति की घोषणा मुख्य न्यायाधीश के सामने करनी चाहिए। 28 अगस्त 2009 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी यह प्रस्ताव पारित किया कि सभी जज अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के लिए सहमत हैं। इसके बाद, 8 सितंबर 2009 को सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ ने 31 अक्टूबर 2009 तक अपनी संपत्ति घोषित करने का संकल्प लिया, लेकिन इसे स्वैच्छिक बना दिया गया था।
क्यों लिया गया यह फैसला
पिछले वर्षों में यह देखा गया कि जजों द्वारा अपनी संपत्ति सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आधिकारिक परिसर में कथित रूप से नकदी मिलने की खबर के बाद न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए। इसी कारण, सीजेआई संजीव खन्ना ने सभी जजों को इस फैसले की याद दिलाई और अब इसे अनिवार्य रूप से लागू करने पर सहमति बनी है।
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