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'आकाश' मिसाइल का मध्य एशिया में परचम, आर्मेनिया के बाद ताजिकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान को भी एक्सपोर्ट

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने की पुष्टि - आर्मेनिया बना था पहला विदेशी खरीदार, भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट की बड़ी सफलता
'आकाश' मिसाइल का मध्य एशिया में परचम, आर्मेनिया के बाद ताजिकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान को भी एक्सपोर्ट
'आकाश' मिसाइल का मध्य एशिया में परचम

नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी 'आकाश' एयर डिफेंस सिस्टम ने अब मध्य एशिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि आर्मेनिया के बाद भारत ने यह सिस्टम ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी दिया है। राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, आर्मेनिया भारत का पहला विदेशी ग्राहक था, जिसने आकाश की कई बैटरी खरीदी थीं। उसके बाद इसे ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी एक्सपोर्ट किया है। रक्षा सचिव ने आकाश  को भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम भारत की स्वदेशी मिसाइल निर्माण क्षमता और उसकी परिपक्वता के सबूत के तौर पर सामने आया है। उन्होंने कहा कि आकाश तेज रफ्तार वाले हवाई टारगेट्स को मार गिराने में बहुत ज्यादा कारगर साबित हुआ है। इसके साथ ही देश में अब इसका प्रोडक्शन भी  स्थिर हो गया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में दूसरे देशों से भी इसकी मांग बढ़ेगी। भारतीय सेना ने भी इसके लिए ऑर्डर दिए हैं।

आकाश एयर डिफेंस सिस्टम के बारे में

यह एक स्वदेशी,  कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली  मिसाइल प्रणाली है। इसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने हवाई हमलों से संवेदनशील इलाकों और अहम जगहों की सुरक्षा के लिए बनाया है। DRDO का कहना है कि यह सिस्टम एक साथ कई टारगेट पर हमला कर सकता है। चाहे वे ग्रुप मोड में हो या ऑटोनॉमस मोड में। इसमें इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर (ECCM) तकनीक भी शामिल है। यह सिस्टम मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगा है और भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना, दोनों में इस्तेमाल हो रहा है।

आकाश के नए वर्जन भी बनाए गए

इस सिस्टम की ऑपरेशनल रेंज 4.5 km से 25 km है। यह 100 मीटर से 20 km की ऊंचाई तक हवाई टारगेट को निशाना बना सकता है। 5.87 मीटर लंबी इस मिसाइल का वजन लगभग 710 kg है और यह टारगेट को निशाना बनाने के लिए कमांड गाइडेंस का इस्तेमाल करती है। आकाश प्रोग्राम के नए वर्जन भी विकसित किए गए हैं। इनमें आकाश प्राइम और आकाश-NG शामिल हैं। इनमें बेहतर सीकर, सेंसर और दूसरे सुधार किए गए हैं।

ब्रह्मोस भी खरीद रहे दूसरे देश

  • फिलीपींस: फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइल का पहला और प्रमुख ग्राहक है। उसे करीब 330 मिलियन डॉलर की मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति की जा चुकी है।
  • इंडोनेशिया और वियतनाम: दक्षिण-पूर्व एशिया के इन देशों के साथ भी भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की बिक्री के लिए समझौते और अनुबंध किए हैं।
  • अन्य देश: मलेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे कई अन्य देश भी इस मिसाइल को खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।
  • रक्षा निर्यात : भारत का कुल रक्षा निर्यात 600 मिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने वाला है।
Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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