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मूक-बधिर भाई को नहीं मिली नौकरी तो दिव्यांग स्टाफ को रखा

चरणजीत रावत ग्वालियर। अगर आप में हौसला है तो आपके लिए कोई भी काम नामुमकिन नहीं है। मूक बधिर नवीन वर्मा और उसके छह दोस्त (मूक बधिर) समाज के लिए मिसाल है। पढ़े लिखे होने के बाद भी परिवार पालने के लिए एक नाश्ते की दुकान पर काम कर रहे है। ये दुकान नवीन के बड़े भाई सोनू वर्मा की है। ग्वालियर शहर में जनक गंज डिस्पेंसरी के सामने सोनू और नवीन वर्मा की एक नाश्ते की दुकान है। सोनू ने बताया कि उसका भाई नवीन जन्म से ही मूक बधिर है। नवीन को उसके मूक-बधिर होने पर कहीं नौकरी नहीं मिली। ऐसे में नवीन के स्कूल के 6 दोस्त अरुण नागर, धर्मेंद्र माहौर, भरत चौरसिया, मनीष रजक, राजा खान और विजय जोशी को काम दिया।

नवीन और उसके दोस्त ग्रुप में करते हैं काम

सोनू वर्मा ने बताया कि नवीन व उसके दोस्त एक ग्रुप में काम करते हैं। इनके अलावा हम किसी और कर्मचारी को अपने यहां काम पर नहीं रखते। इनसे ज्यादा कोई ईमानदार हमें नहीं मिल सकता। मैंने साथ रहते-रहते इनकी भाषा में बात करना और इनकी बात को समझना अच्छी तरह से सीख लिया है।

इशारों की भाषा समझते हैं परिवार के सदस्य

मेरा भाई नवीन मूक बधिर है तो हमने भी उसकी शादी एक मूक बधिर लड़की से की है। उनका एक बेटा है, जिसने अपने माता-पिता के साथ रहकर उनकी भाषा सीख ली है। वो इनको अच्छी तरह समझता है और वे भी उसकी भाषा समझ लेते हैं। पूरा परिवार ही इस भाषा को समझने लगा है।

लोग भी करते हैं प्रशंसा

सोनू वर्मा ने बताया कि लोग दुकान पर काम कर रहे मूक बधिरों की प्रशंसा भी करते हैं। वे पिछले 13 साल से काम कर रहे हैं। उन्हें अपने काम में महारत हासिल हो गई है। कोई भी काम ऐसा नहीं है, जो वे नहीं कर सकते।

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