अन्यताजा खबरभोपालमनोरंजन

81 वर्षीय डॉ. पद्मा ने किया भरतनाट्यम, दर्शकों ने दिया स्टैंडिग ओवेशन

भारत भवन में आयोजित नृत्य में अद्वैत कार्यशाला के दूसरे दिन दर्शकों ने भी किया नृत्य

बहुकला केंद्र भारत भवन के अंतरंग सभागार में बैठे कलाप्रेमी उस समय विलक्षण प्रस्तुति के साक्षी बने जब स्वयं 81 वर्षीय डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम मंच पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति देने पहुंचीं। डॉ. पद्मा ने शंकराचार्य विरचित भजन गोविन्दम, भज गोविंदम… की मनोहारी प्रस्तुति दी। लगभग 15 मिनट की इस प्रस्तुति के दौरान उन्होंने आंगिक, वाचिक, कदमताल और भाव-भंगिमाओं का एक ऐसा संसार रचा जिसमें दर्शक पूरी तरह सहभागी बने।

इस प्रस्तुति के अंत में दर्शकों ने लगभग 5 मिनट तक डॉ. पद्मा को स्टैंडिंग ओवेशन दिया। मौका था, भारत भवन में आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मप्र पर्यटन निगम और भारत भवन न्यास के संयुक्त तत्वावधान में चल रही तीन दिवसीय कार्यशाला नृत्य में अद्वैत का। भक्ति गीतों पर झूम उठे श्रोता: कार्यशाल में दूसरे दिन का समापन संकीर्तन की प्रस्तुति के साथ हुआ। इसमें गायक हर्षल पुलेकर ने जय-जय राधा रमण…, कौन कहता है भगवान आते नहीं…. सहित कई भक्ति गीतों को पेश किया।

पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम ने 15 मिनट तक भारत भवन के अंतरंग सभागार में भरतनाट्यम नृत्य की दी प्रस्तुति।

भारत में कला परंपरा दर्शकों के उत्थान के लिए है

कोरियोग्राफर डॉ. रेवती रामचंद्रन ने कहा कि इस तरह के आयोजन मन को विस्तारित करते हैं। यह हमारे आंतरिक एवं आध्यात्मिक विकास में उपयोगी है। उन्होंने कहा कि जब तक हम नृत्य करते हैं तो देह भाव से ऊपर उठकर अपनी पहचान को विलोपित कर देते हैं। कलाकार मंच पर सृष्टिकर्ता की भूमिका में होता है, जो अपनी रचनात्मकता से कला का निर्माण करता है। डॉ. रेवती ने कहा कि भारत में कला परंपरा दर्शकों के उत्थान के लिए है।

संबंधित खबरें...

Back to top button