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भोपाल : बेगमों के जमाने बाद लद गए थे दिन… अब 94 साल बाद मस्जिदों में नमाज अदा कर सकेंगी महिलाएं

भोपाल। राजधानी में बेगमों के दौर की व्यवस्था लौट आई है। अब भोपाल की मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में नमाज पढ़ सकेंगी। महिलाओं के मस्जिद में सजदा करने की यह रिवायत 94 साल पहले खत्म हो चुकी थी। इसकी शुरुआत बीते शुक्रवार यानी 30 अगस्त को जुमे की नमाज अदा करने के साथ की गई। ईदगाह की नजमुल मस्जिद में तमाम खास इंतजाम के बीच महिलाओं ने नमाज अदा की। इसे लेकर ऑल इंडिया वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाहिस्ता अंबर ने कहा है, भोपाल में महिलाओं की नमाज अदायगी पूरे हिंदुस्तान के लिए पैगाम है।

बेगमों के जमाने में हुआ करते थे इंतजाम

भोपाल की रियासत अक्सर बेगमों के हाथ में रही है। उस जमाने में महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की पूरी इजाजत थी। बकायदा मस्जिद में नमाज के लिए उनको अलग से सुविधाएं मुहैया कराई जाती थी। भोपाल की कुलसुम बिया, मस्जिद मांजी साहिबा, मस्जिद नन्हीं बिया जैसी कई मस्जिदें महिलाओं के ही नाम पर हैं। जब तक बेगमों का शासन रहा तब तक महिलाओं का मर्दों की तरह मस्जिदों में नमाज अदा करना आम बात थी। हालांकि, भोपाल में स्थित एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताजुल मसाजिद में महिलाओं के नमाज पढ़ने की अलग से व्यवस्था है। उनके लिए वुजुखाने, वॉशरूम और नमाज पढ़ने की अलग जगह सुनिश्चित की गई हैं।

महिला नवाबों का शासन खत्म होने से पड़ा असर

भोपाल में साल 1930 में नवाब सुल्तान जहां बेगम का जब निधन हुआ, उसके बाद ही समाज में कायम रिवाजों में बदलाव आने शुरू हुए। साल 1950 आते-आते महिलाओं ने मस्जिदों में नमाज पढ़ना बंद कर दिया। हालांकि, यह किसी फतवे या मर्दों के द्वारा चलाई गई मुहिम के कारण नहीं हुआ था बल्कि बेगमों का दौर खत्म होते ही महिलाओं ने अपने दायरे सीमित कर लिए थे।

मरिजों के साथ आ रही महिलाओं को हो रही थी परेशानी

भोपाल की ईदगाह की नजमुल मस्जिद के पास ही कैंसर और टीबी के अस्पताल भी हैं। इन अस्पतालों में मरीजों के साथ, उनकी देखरेख करने के लिए बहुत सारी मुस्लिम महिलाएं भी आती थीं। उन्हें नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह नहीं मिलती थी। ऑल इंडिया वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाहिस्ता अंबर ने कहा कि हम इसके लिए 1997 से ही लगातार कोशिश कर रहे थे। आखिरकार हम भोपाल की महिलाओं को मस्जिदों में नमाज अदा करने का हक दिलाने में कामयाब रहे। मुस्लिम महासभा अध्यक्ष मुनव्वर अली खान ने कहा है, शहर में मस्जिद की अधिक संख्या में मौजूदगी के बाद भी महिलाएं उसमें नमाज अदा नहीं कर सकतीं। क्योंकि इन मस्जिदों में महिलाओं के नमाज की पाबंदी है। अगर पाबंदी को हटाया जाए तो महिलाओं की नमाज के लिए सहूलियतें बढ़ेंगी।

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