
बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में कोयला खदान में दबकर 3 कर्मचारियों की मौत हो गई। हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शवों को बाहर निकाला गया और घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
कैसे हुआ हादसा?
दोपहर करीब 3 बजे छतरपुर-1 खदान के कंट्यूनर माइनर सेक्शन में अचानक छत ढह गई, जिससे तीन कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि 10 मीटर लंबी छत का हिस्सा गिरा, जिसके कारण ये दुर्घटना हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कोयला काटने के दौरान अचानक छत गिर गई। जिस जगह हादसा हुआ, वह जॉय माइनिंग सर्विस का सेक्शन है, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई मशीन लगी थी। यह कंपनी कोलकाता की बताई जा रही है।
हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारी
गोविंद कोसरिया (37 वर्ष) – शिफ्ट इंचार्ज
रामप्रसाद चौहान (46 वर्ष) – माइनिंग सरदार
रामदेव पंडोले (49 वर्ष) – ओवरमैन
इन तीनों की मौत की पुष्टि एसपी निश्चल झारिया ने की है। वहीं, एसडीएम अभिजीत सिंह ने बताया कि हादसे में तीन ही केजुअल्टी हुई हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कराया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक निश्चल झारिया मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। वहीं, विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने भी घटनास्थल का दौरा किया। कलेक्टर ने WCL के जीएम को लाइफ कवर स्कीम से मृतकों के परिवारों को डेढ़ लाख रुपए की सहायता राशि तुरंत देने के निर्देश दिए। इसके अलावा, एक्सग्रेसिया, ग्रेच्युटी, कंपनसेशन, पीएफ और लाइफ इनकैशमेंट की राशि जल्द देने के भी आदेश दिए गए।
सुरक्षा में लापरवाही के आरोप
भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने बताया कि खदान की छत को पर्याप्त सपोर्ट नहीं दिया गया था, जिससे यह हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि 2 फुट मोटा और ढाई मीटर लंबा रूफ गिरा था, जिसके नीचे तीनों कर्मचारी दब गए। उन्होंने आरोप लगाया कि टीम मशीन से कोयला खुदाई करने के तुरंत बाद मौके पर चली गई थी, जबकि सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज किया गया। बगैर सपोर्ट की छत के नीचे पहुंचने से यह दुर्घटना घटी।
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