
भोपाल। सड़कों में बढ़ते ट्रॉफिक दबाव को देखते हुए राज्य सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) भिंड इटावा सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में दस नई सड़कें बनाएगा। इसके लिए एशिएन डेव्हलप बैंकएडी बी से 1,400 करोड़ का ऋण मिलेगा। लोन की राशि कई चरणों में बैंक को वापस की जाएगी। इन सड़कों का निर्माण कार्य बारिश के बाद प्रारंभ होगा जो दो वर्ष के अंदर पूरा किया जाएगा। इन सड़कों से करीब एक लाख वाहन रोज अलग- अलग क्षेत्रों के लिए गुजरते हैं।
एमपीआरडीसी ने सड़कों के निर्माण के लिए पांच पैकेज में बनाने के लिए ठेकेदारों से अनुबंध किया है। इनका निर्माण दो-तीन माह बाद प्रारंभ कर दिया जाएगा। पांच वर्ष तक के लिए इन सड़कों के रख रखाव का काम भी इन्हीं ठेकेदारों को दिया जाएगा। इन सड़कों की लंबाई करीब ढाई से तीन सौ किमी है। यह सड़कें पहले एक लेन थी, अब इन्हें टू लेन बनाया जा रहा है।
400 करोड़ की 44 सड़कें भी
अनूपपुर-चचाई, आरोन-अशोक नगर और करेरा-भितरवार सहित करीब 44 सड़कों का निर्माण इस परियोजना से किया जा रहा है। इन सड़कों की लागत चार सौ करोड़ से अधिक है। ये सड़कें काफी जर्जर स्थिति में हैं। बीओटी से बनेगी: दमोह-पथरिया- गढ़ाकोटा मार्ग पर 17 करोड़ की लागत से एक पुल का निर्माण कराया जाएगा।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
सड़क बनाने के साथ अतिक्रमण भी हटाया जाएगा। सड़कें चौड़ीकरण की जद में जो मकान और दुकानें आ रहीं हैं, उन्हें हटाया जाएगा। अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासन को दी गई है। जिला प्रशासन ठेकेदारों को 6 माह के अंदर अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाएगा और सड़कें निर्माण के लिए जगह उपलब्ध कराई जाएगी।
सड़कों के दोनों ओर होगा पौधरोपण, फॉरेस्ट को काम
सड़कों के दोनों तरफ पौधरोपण किया जाएगा। इससे पहले इन सड़कों के जद में जो पेड़ हैं, उन्हें हटाने और काटने की कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है। वन विभाग को पौधों की गिनती कर इसके बदले में रोपे जाने वाले पौधों की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा ठेकेदार सड़क के दोनों तरफ पौधरोपण करेगा और उसकी निगरानी पांच वर्ष तक की जाएगी।
एबीडी परियोजना से बनाई जाएंगी एक दर्जन सड़कें
प्रदेश में करीब एक दर्जन सड़कों का निर्माण एडीबी परियोजना की मदद से कराया जा रहा है। कुछ सड़कों में निर्माण कार्य ठेकेदारों द्वारा शुरू कर दिया गया है और कुछ में प्रारंभ होना है। इनमें निर्माण की समय सीमा अलग अलग तय की गई है। कार्य की गुणवत्ता और निगरानी पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जा रहा है। -गोपाल सिंह, मुख्य अभियंता, एमपीआरडीसी