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BSNL ने जहां हाईस्पीड इंटरनेट का दावा किया, वहीं स्थिति खराब

ई-पंचायत: ऑप्टिकल फाइबर और ब्रॉडबैंड मॉडम बने शोपीस, कनेक्टिविटी नहीं

धर्मेंद्र त्रिवेदी-ग्वालियर। ई-पंचायत और सुशासन को लेकर सितंबर-2022 में कूना में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चीता पुनर्स्थापन परियोजना की शुरुआत की गई थी। इस दौरान बीएसएनएल ने हाई स्पीड इंटरनेट देने का दावा भी किया था। जिसमें बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक सत्यानंद परमहंस और तत्कालीन प्रधान महाप्रबंधक बिजनेस एरिया प्रदीप सिंह ने ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाकर हाईस्पीड इंटरनेट देने का दावा किया था। जिस कराहल ब्लॉक से यह दावा किया गया, वहीं के गांवों में इंटरनेट की समस्या ज्यादा है।

मध्य प्रदेश की 22,921 पंचायतों में भारतनेट परियोजना के अंतर्गत ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी दी जानी थी। इसके लिए बीएसएनएल ने जिला स्तर पर अनुबंध किए। फिर भी सचिव/जीआरएस को ई- पंचायत का कार्य जियो या एयरटेल की सिम से पड़ रहा है। भारत सरकार ने वर्ष 2016 में भारत नेट परियोजना के अंतर्गत 6.4 लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़कर बेहतर कनेक्टिविटी की तैयारी की थी। ब्रॉडबैंड की प्रॉपर कनेक्टिविटी न मिलने से ऑनलाइन एंट्री का दबाव बना रहता है। मनरेगा, सीएमएवाय, पीएमएवाय सहित अन्य पोर्टल पर फीडिंग करने के लिए मशक्कत करनी होती है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा पूछ चुके हैं सवाल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो सांसद वीडी शर्मा ने अक्टूबर 2024 के लोकसभा सत्र में ब्रॉडबैंड सेवा को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में बताया गया था कि मध्यप्रदेश की 17,850 पंचायतों को ब्रॉडबैंड सेवा से जोड़ा जा चुका है। इनमें खजुराहो संसदीय क्षेत्र के छतरपुर जिले की 558 पंचायतों में से 225 को ब्रॉडबैंड से जोड़ने की बात कही गई। बता दें कि कराहल क्षेत्र की पंचायतों में बीएसएनएल सहित निजी कंपनियों का भी नेटवर्क नहीं रहता। काम पूरे करने के लिए सचिवों को नेटवर्क क्षेत्र में आने की मशक्कत करनी पड़ती है। आदिवासी क्षेत्र कराहल की कुछ सुदूर क्षेत्र में मौजूद ग्राम पंचायतों में बने ई-दक्ष केन्द्र भी दबंगों के कब्जे में हैं।

यह कहती है रिपोर्ट

मामले में बताया गया है कि प्रदेश में 53738 गांव 22921 पंचायतों में विभाजित हैं। वर्ष 2020 में लोकसभा में पेश की गई रिपोर्ट में माना गया था कि 5071 पंचायतों में अभी भी इंटरनेट नहीं पहुंचा है। जिससे लोगों के ऑनलाइन काम नहीं हो पाते।

एक नजर योजना पर

  • वर्ष 2016 में प्रदेश की पंचायतों को ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़कर ई-पंचायत बनाने का निर्णय हुआ।
  • 220 करोड़ रुपए का सामान खरीदा गया। ई-दक्ष केन्द्र बने। इन केन्द्रों पर प्रिंटर-कंम्यूटरस्क्री न आदि भेजी गईं।

काम कराया जा रहा है

ई-पंचायत के लिए सभी तकनीकी पहलुओं को पुख्ता तरीके से परखने के बाद काम कराया जा रहा है। शुरूआत में हो सकता है, कुछ समस्या हों, लेकिन भविष्य में निश्चित ही यह प्रणाली लाभदायक रहेगी। -छोटेसिंह, डायरेक्टर-पंचायत राज

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