
लंदन। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 27 मार्च को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के केलॉग कॉलेज में एक स्पीच देने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में सामाजिक विकास, महिला सशक्तिकरण और गरीबों के कल्याण पर अपनी सरकार की नीतियों पर बात की। लेकिन उनकी स्पीच के दौरान विरोध और हंगामा हो गया, जिससे कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया।
SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया और कई तीखे सवाल दागे। इस दौरान ममता बनर्जी को भारत की आर्थिक प्रगति, टाटा नैनो प्रोजेक्ट और आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने पड़े।
भाषण के दौरान विरोध और नारेबाजी
जैसे ही ममता बनर्जी ने अपने शासन मॉडल पर चर्चा शुरू की और कहा कि उनका प्रशासन भेदभाव नहीं करता और सभी वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता देता है। तभी दर्शकों में से कुछ लोगों ने पोस्टर दिखाने शुरू कर दिए। इन पोस्टरों में पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। छात्रों ने ‘गो बैक’ के नारे लगाए और आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे।
जब छात्रों ने टाटा और आर.जी. कर केस से जुड़े सवाल पूछे तो ममता बनर्जी ने जवाब दिया, “यह मामला अदालत में है और केंद्र सरकार ने इसे अपने हाथ में ले लिया है। यह अब हमारे पास नहीं है।”
भारत की अर्थव्यवस्था पर बयान और विवाद
ममता बनर्जी से जब पूछा गया कि, भारत ने यूके को ओवरटेक कर लिया है और वह जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। तब उन्होंने जवाब दिया, “I Beg to Differ” (मैं इससे सहमत नहीं)। उनके इस बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने 21 सेकंड का एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए कहा कि, ममता बनर्जी को भारत की आर्थिक उन्नति से समस्या है और यह शर्मनाक है कि एक संवैधानिक पद पर बैठी व्यक्ति इस तरह की टिप्पणी कर सकती हैं।
SFI-UK ने ली प्रदर्शन की जिम्मेदारी
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने इस विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली। SFI-UK ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, “हम पश्चिम बंगाल के छात्रों और श्रमिक वर्ग के समर्थन में ममता बनर्जी और टीएमसी के भ्रष्ट, अलोकतांत्रिक शासन के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं।”
निवेश और टाटा नैनो प्रोजेक्ट पर सवाल
जब ममता बनर्जी ने दावा किया कि, बंगाल में लाखों करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आए हैं, तो एक व्यक्ति ने उनसे विशेष निवेशों के नाम बताने को कहा। इस पर ममता ने जवाब दिया, “बहुत सारे हैं…” लेकिन इससे पहले कि वह विस्तार से बता पातीं, दर्शकों ने विरोध करते हुए चुप करा दिया।
टाटा के नैनो प्रोजेक्ट पर जब सवाल पूछा गया कि यह बंगाल से बाहर क्यों गया, तो ममता ने जवाब दिया कि टाटा और कॉग्निजेंट अभी भी बंगाल में काम कर रहे हैं। उन्होंने माहौल हल्का करने के लिए सवाल पूछने वाले व्यक्ति को मिठाई देने की बात कही।
धार्मिक भेदभाव के लगे आरोप
जब एक दर्शक ने ममता पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया, तो उन्होंने जवाब दिया, “मैं सबके लिए काम करती हूं। मैं हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी का सम्मान करती हूं। केवल एक जाति का नाम मत लीजिए, सभी का नाम लीजिए।” उन्होंने कहा कि अल्ट्रा लेफ्ट और सांप्रदायिक शक्तियां इस तरह के झूठे आरोप लगा रही हैं।
‘मुझे बोलने दें, संस्थान का अपमान न करें’
ममता बनर्जी के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भाषण के दौरान छात्रों ने तीखे सवाल किए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। जब लोग शांत नहीं हुए, तो उन्होंने अनुरोध किया कि राजनीति न करें और संवाद बनाए रखें। उन्होंने कहा कि, यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है और यदि कोई उनसे असहमत है, तो बंगाल में आकर विरोध कर सकता है। उन्होंने लोकतंत्र में सभी की आवाज सुने जाने की बात कही और आश्वासन दिया कि वह ध्यानपूर्वक सबकी बातें सुनेंगी। इसके बावजूद, कार्यक्रम में लगातार सवाल उठते रहे और माहौल गरमाता गया।
ममता बनर्जी ने कहा, “आप मुझे बोलने दें। आप मेरा नहीं, बल्कि अपने संस्थान का अपमान कर रहे हैं। ये लोग हर जगह ऐसा करते हैं, जहां भी मैं जाती हूं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं केवल जनता के सामने सिर झुकाऊंगी, किसी और के सामने नहीं।”
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