समान नागरिक संहिता (UCC) ऐसा कानून है, जो सभी भारतीय नागरिकों के लिए शादी, तलाक, गोद लेना, भरण-पोषण और संपत्ति जैसे पारिवारिक मामलों में समान नियम लागू करने की बात करता है। इसमें धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून नहीं होते।

गोवा में लंबे समय से समान नागरिक संहिता लागू है। इसके अलावा उत्तराखंड, गुजरात, असम और अब मध्य प्रदेश ने भी इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी नियम लागू होंगे। शादी, तलाक, गोद लेना और संपत्ति के मामलों में समान अधिकार मिलेंगे। महिलाओं और पुरुषों के बीच कानूनी बराबरी को बढ़ावा मिलेगा। पारिवारिक विवादों के निपटारे में कानूनी प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और सरल हो सकती है। संविधान में समानता के सिद्धांत को और मजबूती मिलेगी।

UCC लागू होने पर विवाह, तलाक, गोद लेना, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसी कानूनी व्यवस्था होगी।

इसका मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देना, महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता बढ़ाना और पारिवारिक कानूनों को अधिक स्पष्ट व एकरूप बनाना है।

समान नागरिक संहिता लंबे समय से राष्ट्रीय बहस का विषय रही है। समर्थक इसे समानता की दिशा में बड़ा कदम मानते हैं, जबकि कुछ लोग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाते हैं। इसलिए UCC पर चर्चा लगातार जारी है।

अब तक भारत में अलग-अलग धर्मों के अपने-अपने पर्सनल लॉ हैं। जैसे हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों, पारसियों के लिए अलग कानून, यानी एक ही तरह के मामले में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग नियम लागू होते हैं।