धोनी का पहला प्यार क्रिकेट नहीं था, स्कूल के दिनों में वो फुटबॉल टीम के गोलकीपर थे, लेकिन एक दिन उनके स्पोर्ट्स टीचर ने उन्हें कहा- क्रिकेट टीम को विकेटकीपर चाहिए, ट्राय करोगे और वहीं से शुरू हुआ सफर, जो वर्ल्ड कप ट्रॉफी तक जा पहुंचा।

धोनी अक्सर कहते हैं कि उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो सिर्फ सचिन तेंदुलकर को देखकर, जब माही बचपन में क्रिकेट खेलते थे तो वह सचिन का पोस्टर बाजार से खरीदकर अपने घर की दीवार पर लगाते थे।

धोनी के पहले और बचपन के कोच (गुरु) केशव रंजन बनर्जी हैं, जिन्होंने स्कूल के दिनों में उनकी खेल प्रतिभा को पहचाना था। इसके अलावा, पूर्व क्रिकेट प्रशासक और मेंटर देवल सहाय भी उनके शुरुआती मार्गदर्शक थे

अपने शुरुआती करियर में धोनी क्रिकेट में आने से पहले रेलवे में टीटी की नौकरी की थी, लेकिन कुछ समय बाद उसमें उनका मन नहीं लगा और कुछ बड़ा करने की उनकी जिद ने उन्हें वह नौकरी छोड़ने को मजबूर किया और बाद में वे भारत के सफल कप्तान बने

धोनी का डेब्यू मैच पाकिस्तान के खिलाफ था और उन्होंने उनकी शुरुआत खराब रही थी। पहली ही पारी में रन आउट हुए थेस लेकिन उनके लंबे बाल और एग्रेसिव बैटिंग ने सबका ध्यान खींचा।

टीम इंडिया जब भी प्रेशर में होती थी, धोनी हमेशा अपने शांत नैचर के लिए जाने जाते थे। आखिरी ओवर में, जब हर कोई नर्वस होता, तो धोनी बस अपने दस्ताने कसते और स्टंप्स के पीछे से सब कंट्रोल करते थे।