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पुरी की रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग भव्य रथ तैयार किए जाते हैं। इन रथों को हजारों श्रद्धालु मिलकर खींचते हैं।

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हर साल ओडिशा के पुरी में होने वाली इस यात्रा में लाखों भक्त शामिल होते हैं। देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग इस ऐतिहासिक उत्सव का हिस्सा बनने पहुंचते हैं।

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मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ मंदिर से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देते हैं। यह पल श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास माना जाता है।

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रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ की एक खास परंपरा निभाई जाती है, जिसमें भगवान कुछ समय के लिए भक्तों को दर्शन नहीं देते। इसके बाद नए रूप में दर्शन होते हैं।

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जगन्नाथ रथ यात्रा की खास बात यह है कि भगवान के तीनों रथ हर साल नए बनाए जाते हैं। इन्हें पारंपरिक तरीके और विशेष नियमों के अनुसार तैयार किया जाता है।

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पुरी जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद अपनी खास परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां बनने वाले प्रसाद को लाखों श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जाता है और इसे बेहद पवित्र माना जाता है।

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जगन्नाथ रथ यात्रा भारत की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह उत्सव लोगों को भक्ति और एकता के साथ जोड़ने का काम करता है।

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