
हेमंत नागले, इंदौर। मध्य प्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वर्ष 2018 से लगातार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी सरकार से अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं, लेकिन अब तक उनकी 3 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं हुई हैं। जिसके विरोध में एक दिन का सामूहिक अवकाश लेते हुए सभी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कलेक्टर कार्यालय जाकर ज्ञापन दिया और अपना रोष भी व्यक्त किया।
सरकार अपने वादे नहीं निभा रही : स्वास्थ्य कर्मचारी
स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना था कि कई वर्ष गुजरने के बाद भी सरकार अपने वादे को नहीं निभा रही है। सरकार सिर्फ आश्वासन देकर अपने वादों से मुकर जाती है। जनवरी में प्रदेश के 23 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी एक साथ हड़ताल पर थे और उन्होंने नियमितीकरण को लेकर पूरे प्रदेश में हड़ताल की थी। गौरतलब है कि जनवरी माह में स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी का घेराव करके संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को उनके सामने रखा था।
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— Peoples Samachar (@psamachar1) February 23, 2023
मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि लंबे समय से उनके नियमितीकरण को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच रस्साकशी चल रही है। लेकिन, अब तक उन्हें स्थाई नहीं किया गया है। वहीं कोविड काल में जितने भी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया था, उन्हें वापस से कर्मचारी बनाकर लाया जाए। इन मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया है और मांगें पूरी नहीं होने पर जल्द उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।