
ओटावा। कनाडा और अमेरिका के बीच दशकों पुराने मजबूत संबंध अब कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने गुरुवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि, दोनों देशों के बीच वह पुराना रिश्ता अब खत्म हो चुका है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेशी कारों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद आया है। इस फैसले से कनाडा की ऑटो इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है, जिससे देश में हजारों नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।
कनाडा का अमेरिका पर आरोप
ओटावा में कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस से बातचीत में प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि, अमेरिका-कनाडा का आर्थिक और रक्षा सहयोग अब वैसा नहीं रहा जैसा पहले था। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर कनाडा की संप्रभुता का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि, अमेरिका लगातार कनाडा पर कब्जे की धमकी दे रहा है जो स्वीकार्य नहीं है।
ऑटो टैरिफ विवाद: कनाडा पर असर
अमेरिका ने हाल ही में घोषणा की है कि, वह 2 अप्रैल से विदेशी कारों और ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ लगाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम कनाडा की ऑटो इंडस्ट्री के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है। कनाडा की ऑटो इंडस्ट्री में लगभग 5 लाख लोग कार्यरत हैं और यह टैरिफ उनके रोजगार पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।
कनाडा भी लगाएगा अमेरिका पर कड़े टैरिफ
कार्नी ने कहा कि, ट्रंप के इस फैसले के जवाब में कनाडा भी अमेरिका पर कड़े टैरिफ लगाएगा, जिससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने 1965 में अमेरिका-कनाडा के बीच हुए ऑटोमोटिव प्रोडक्ट्स एग्रीमेंट (ऑटो पैक्ट) का हवाला देते हुए कहा कि यह समझौता अब खत्म हो चुका है।
ऑटो पैक्ट: अमेरिका को हुआ था फायदा
ऑटो पैक्ट 1965 में अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन और कनाडा के प्रधानमंत्री लेस्टर पीयरसन के बीच हुआ था, जिससे दोनों देशों की ऑटो इंडस्ट्री को टैरिफ मुक्त व्यापार का लाभ मिला। इस समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियों को कनाडा में कार बेचने के बदले वहां उत्पादन करना जरूरी था, जिससे कनाडा में नौकरियों की संख्या बढ़ी।
हालांकि, 2001 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने इसे समाप्त करने का आदेश दिया क्योंकि जापान और यूरोपीय संघ ने इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद NAFTA (नॉर्थ अमेरिकन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) ने ऑटो व्यापार को नियंत्रित करना शुरू किया।
अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंधों पर संकट
अमेरिका, कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे पर काफी निर्भर हैं। अमेरिका हर साल कनाडा से करीब 421 अरब डॉलर का सामान आयात करता है। जिसमें तेल, प्राकृतिक गैस और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। वहीं कनाडा अपने कुल निर्यात का 75% हिस्सा अमेरिका को भेजता है।
अगर अमेरिका और कनाडा के व्यापारिक संबंध खराब होते हैं, तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री कार्नी ने क्या कहा?
कार्नी ने साफ किया कि, कनाडा अब अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश करेगा। उन्होंने कहा कि, कनाडा अपने कामगारों, उद्योगों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि, वह ट्रंप से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन तब तक किसी व्यापार वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगे जब तक अमेरिका कनाडा के लिए सम्मान नहीं दिखाता।
क्या होगा आगे?
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ता जा रहा है, जिससे दोनों देशों के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। कनाडा को अब अपने व्यापारिक सहयोगियों का विस्तार करना होगा, जबकि अमेरिका को भी यह सोचना होगा कि कनाडा के बिना उसकी अर्थव्यवस्था कितनी प्रभावित हो सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि, क्या यह विवाद और बढ़ेगा या दोनों देश किसी नए समझौते पर पहुंचेंगे। फिलहाल, कनाडा और अमेरिका के बीच दशकों पुराना सहयोग संकट के दौर से गुजर रहा है।