डायबिटीज दो नहीं, तीन तरह के होते हैं, टाइप-5 भी है नया रूप
थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित हुई कांग्रेस में दी गई मान्यता

बैंकॉक। दुनिया भर में मधुमेह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, अक्सर टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के बारे में ही सुना जाता है, लेकिन कुपोषण से जुड़े मधुमेह का नाम टाइप-5 डायबिटीज रखा गया है। इसे पहली बार तकरीबन 70 साल पहले दर्ज किया गया था, जिस कंडीशन को पहले अनडिफाइन रखा गया था, उसे हाल ही में थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (आईडीएफ) की वर्ल्ड डायबिटीज कांग्रेस में टाइप-5 डायबिटीज के तौर पर नामित किया गया है। ये कंडीशन, जो अक्सर यंग और दुबले एडल्ट्स में होती है। पहली बार 1955 में जमैका में रिपोर्ट की गई थी और फिर इसे जेटाइ प डायबिटीज के रूप में डिफाइन किया गया था। हालांकि 1999 में डब्ल्यूएचओ ने इसे डायबिटीज के नाम से भी हटा दिया था।
क्या है टाइप-5 डायबिटीज
- ये कुपोषण से जुड़ा डायबिटीज है, जो आमतौर पर लो और मिडिल इनकम वाले देशों में दुबले और कुपोषित टीनएजर्स और यंग एडल्ट्स को प्रभावित करता है।
- अनुमान है कि टाइप 5 डायबिटीज दुनिया भर में 20 से 25 मिलियन (दो से ढाई करोड़) लोगों को प्रभावित करता है, खास तौर से एशिया और अफ्रीका में।
- पहले की फाइंडिंग्स से पता चला था कि कुपोषण से जुड़ा डायबिटीज इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होता है।












