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भोपाल सहित 13 जिलों में 100 से ज्यादा शत्रु संपत्ति अपने कब्जे में लेगी सरकार

मध्य प्रदेश में ज्यादातर शत्रु संपत्तियों पर हैं अतिक्रमण

अशोक गौतम-भोपाल। राज्य सरकार राजधानी भोपाल में नानी की हवेली सहित प्रदेश के 13 जिलों में 100 से अधिक शत्रु संपत्तियों को अपने कब्जे में करेगी। इन संपत्तियों से अतिक्रमण भी हटाने का काम होगा। इन पर मल्टी स्टोरी भवन व व्यावसायिक कॉम्पलेक्स बनाने का काम होगा। इनमें से कुछ संपत्तियां राज्य और केंद्र सरकार के अधीन भी हैं। मप्र के राजस्व विभाग के अनुसार ऐसी सबसे ज्यादा संपत्तियां जबलपुर, कटनी, सीहोर में हैं।

इन जिलों में ज्यादातर संपत्तियां अब शहर के बीच में हैं। जिससे इनकी कीमत -खोज परख भी बढ़ गई है। प्रदेश के 42 जिलों के कलेक्टरों ने बताया कि उनके यहां शत्रु संपत्तियां रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं। भारत सरकार ने अब तक 9,400 शत्रु संपत्तियों की पहचान की है।

इन जिलों में शत्रु संपत्ति

भोपाल, हरदा, बैतूल, मंडला, डिंडोरी, सिवनी, कटनी, जबलपुर, सीहोर, सतना, रतलाम, धार, खंडवा। इन जिलों में कुल 200 से ज्यादा शत्रु संपत्तियां चिह्नित की गई हैं।

जानिए क्या होती हैं शत्रु संपत्तियां

ये ऐसे लोगों की संपत्तियां होती हैं, जो आजादी के बाद और पाकिस्तान से युद्ध से पहले भारत छोड़कर दूसरे दुश्मन देशों में चले गए और वहीं की नागरिकता ले ली। ये लोग अपनी भूमि, हवेली सहित अन्य प्रॉपर्टी यहीं छोड़ कर गए हैं।

खेती की जमीन पर किसानों का कब्जा

हरदा, खंडवा सहित कई जिलों में शत्रु संपत्ति पर किसानों का कब्जा है। इन संपत्तियों का कलेक्टर के माध्यम से सीमांकन कराया जाएगा। इसके बाद इन्हें संरक्षित कर सरकार अनुपयोगी जमीन को नीलाम भी कर सकती है। वहीं जहां भूखंड की संख्या ज्यादा है, वहां सरकार उद्योग और निवेश के लिए देगी। शहरों में रहवासी कॉम्पलेक्स व पीएम आवास जैसी योजनाओं के लिए जमीन दी जा सकती है।

इन्हें शत्रु संपत्ति घोषित करने की मांग उठती रही

  • कुछ और संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित करने की मांग होती रही है, उनमें नवाब की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम की बोरबन और बेहटा की 600 से 700 एकड़ जमीन शामिल है।
  • वहीं नवाब की बेटी आबिदा सुल्तान की पूर्व में बेची गई संपत्ति को भी इसमें शामिल करने की बात उठती रही है।
  • राजस्व विभाग की पीएस रहते हुए माला श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट की रिपोर्ट में दोनों संपत्तियों की बात कही थी।

पहचान कर ली है, अब कब्जे में लेंगे

कई जिलों में शत्रु संपत्तियां चिह्नित की गई हैं। इन संपत्तियों से कब्जा हटाने और इन्हें संरक्षित करने का काम किया जाएगा। इस संबंध में सभी कलेक्टरों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टरों को यह भी कहा गया है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज शत्रु संपत्ति का अलग से रिकॉर्ड तैयार करें। -करण सिंह वर्मा, राजस्व मंत्री, मप्र

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