
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने का फैसला किया है। यह निर्णय तब लिया गया जब उनके सरकारी आवास से भारी मात्रा में पैसे बरामद हुए। मामला तब उजागर हुआ जब बंगले में आग लग गई और दमकल कर्मियों को वहां कैश मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामला सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम तक पहुंचा, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
कैसे उजागर हुआ मामला?
बीते सप्ताह दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी। घटना के समय जस्टिस वर्मा शहर में नहीं थे, लेकिन उनके परिवार ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। आग बुझाने के बाद जब दमकल कर्मी बंगले के अंदर पहुंचे, तो एक कमरे में भारी मात्रा में कैश रखा हुआ मिला। पुलिस ने इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी और फिर मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंचा। मामला सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के संज्ञान में आया, जिसके बाद आपात बैठक बुलाई गई।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के नेतृत्व में आपात बैठक बुलाई गई। कॉलेजियम में तीन वरिष्ठतम जजों ने जस्टिस वर्मा को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने की सिफारिश की। कॉलेजियम ने इस बात पर भी सहमति जताई कि सिर्फ ट्रांसफर ही नहीं, बल्कि मामले की गहन जांच होनी चाहिए। यह फैसला न्यायपालिका की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लिया गया।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
- आंतरिक जांच का विकल्प
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने संकेत दिया है कि इस मामले की जांच इन-हाउस प्रक्रिया के तहत की जा सकती है।
- CJI पहले जस्टिस वर्मा से स्पष्टीकरण मांग सकते हैं।
- यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो सुप्रीम कोर्ट के एक जज और दो हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की समिति जांच करेगी।
- इस्तीफा देने का दबाव
- कुछ जजों का मानना है कि जस्टिस वर्मा से इस्तीफा मांगना चाहिए।
- अगर वह इस्तीफा नहीं देते, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
- महाभियोग की संभावना
- अगर जांच में जस्टिस वर्मा दोषी पाए जाते हैं, तो संसद में उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
- संसद में इस मामले पर बहस होगी और जज को हटाने के प्रस्ताव पर मतदान होगा।
न्यायपालिका की छवि बचाने की कोशिश
कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि अगर सिर्फ ट्रांसफर किया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की छवि खराब हो सकती है। जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत है। जस्टिस वर्मा के खिलाफ संभावित कार्रवाई का निर्णय आने वाले दिनों में लिया जा सकता है।
जस्टिस यशवंत वर्मा का करियर
- 2014 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज बने।
- अक्टूबर 2021 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ट्रांसफर किया गया।
- वर्तमान में वे दिल्ली हाई कोर्ट में वरिष्ठतम जजों में से एक थे।
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