
सियोल। दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने राष्ट्रपति यून सुक योल के खिलाफ चल रहे महाभियोग को सर्वसम्मति से बरकरार रखते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने का आदेश दिया है। इस फैसले के साथ ही देश में अगले 60 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति के चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
संवैधानिक अदालत ने कहा- यून सुक योल ने देश की स्थिरता को खतरे में डाला
दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति यून सुक योल ने संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन किया और देश की स्थिरता को खतरे में डाला। अदालत का यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्र के सर्वोच्च संस्थानों में भी उनके खिलाफ एक आम राय थी।
फैसले से निराश हुए समर्थक
राष्ट्रपति यून के समर्थक इस फैसले से निराश हैं और इसे राजनीति से प्रेरित करार दे रहे हैं। वहीं, उनके विरोधियों ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी ने अदालत के फैसले को जनता के लिए बड़ी जीत करार दिया है और कहा कि यह निर्णय देश में कानून और न्याय की ताकत को दर्शाता है।
दिसंबर में की थी मार्शल लॉ की घोषणा
पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति यून सुक-योल ने अचानक देश में मार्शल लॉ लागू करने की घोषणा कर दी थी। हालांकि, सांसदों और जनता के भारी विरोध के चलते उन्हें कुछ ही घंटों में इस आदेश को वापस लेना पड़ा। इसके बाद, उनके खिलाफ राजद्रोह के आरोपों की जांच शुरू हुई, जिसने उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया।
अब संविधान के अनुसार, अगले 60 दिनों में देश में नए राष्ट्रपति के चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव आयोग ने कहा है कि जल्द ही चुनाव की तारीखों की घोषणा की जाएगी।