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रोहू, कतला के बीज की क्वालिटी बेहतर, प्रोडक्शन दोगुना

नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस विवि के एक्सपर्ट्स की रिसर्च मछली पालकों के लिए बनी वरदान

हर्षित चौरसिया-जबलपुर। प्रदेश में तेजी से बढ़ रही रोहू और कतला मछलियों की मांग को देखते हुए नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस विवि के अंतर्गत संचालित फिशरीज साइंस कॉलेज के एक्सपर्ट की तकनीक अब इन मछलियों के पालकों के लिए वरदान साबित हो रही है। एक्सपर्ट्स ने फार्म पर रोहू और कतला मछली के उच्च क्वॉलिटी के बीज (जीरा) की लंबाई 2.5 इंच तक कर दी है। 21 दिन में ही विशेषज्ञों ने तकनीक को और बेहतर बनाते हुए रोहू और कतला के बीजों की लंबाई बढ़ाने का काम किया है। इससे मछली की क्वालिटी और प्रोडक्शन दो गुना हो गया है। आमतौर पर बीज की लंबाई 15 दिन में 1 इंच तक ही पहुंच पाती है।

एक करोड़ बीज का उत्पादन : रोहू, कतला की मांग को देखते हुए बीज उत्पादन किया जा रहा है। इस वर्ष करीब 2 करोड़ रोहू व कतला के बीज (जीरा) का उत्पादन किया गया है। बालाघाट, दमोह, डिंडोरी, मंडला आदि में इसकी डिमांड सबसे ज्यादा है। – डॉ. शिवमोहन सिंह, फिशरीज कॉलेज के क्षेत्र प्रबंधक

मत्स्य पालकों और किसानों का समय और पैसा बचेगा : एक्सपर्ट ने बताया कि मत्स्य बीज हैचरी से ही उन्नत किस्म की रोहू, कतला एवं नरेनी प्रजाति की मछली का बीज उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इससे बंगाल, बिहार और आंध्र प्रदेश से मध्य प्रदेश तक बीज को लाने में लगने वाले समय और पैसे की भी बचत होगी।

सेहत के लिए लाभकारी होते हैं मछली में मौजूद तत्व

रोहू और कतला मछली में आयरन, जिंक, आयोडीन, पोटैशियम, कैल्शियम सेलेनियम और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। रोहू मछली में फैट की मात्रा काफी कम होती है। सेहत के लिए इसके कई लाभ देखने को मिलते हैं। इसमें प्रोटीन और ओमेगा 3 फैटी एसिड हार्ट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। – डॉ. आदित्य परिहार, एमडी मेडिसिन

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