
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में रंगपंचमी पर होने वाली विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक गेर बुधवार को निकलेगी। इस गेर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, एनआरआई और लाखों लोग हिस्सा लेंगे। गेर में लाखों लीटर पानी और हजारों किलो गुलाल उड़ाया जाएगा, और नाच-गाने के लिए डीजे भी लगाए जाएंगे। इस बार गेर में कुछ नया देखने को मिलेगा, जिसमें तीन गेर और एक फाग यात्रा शामिल होगी। प्रशासन और आयोजकों ने गेर के लिए पुख्ता सुरक्षा और सफाई व्यवस्था की तैयारी की है।
गेर में शामिल होंगे मुख्यमंत्री और एनआरआई
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि इस बार की गेर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। इसके साथ ही एनआरआई का रथ भी गेर में होगा। नगर निगम पिछले दो सालों से आधिकारिक रूप से गेर में शामिल हो रहा है, और इस बार नगर निगम की अपनी गेर भी निकलेगी।
गेर में छतों पर बुकिंग और बढ़ते दर्शक
गेर के आयोजन को लेकर लोग छतों पर बुकिंग करा रहे हैं ताकि वे इस भव्य आयोजन को देख सकें। अभी तक 370 लोगों ने छत बुक कराई हैं। पहले की तुलना में अब लाखों लोग गेर में शामिल होते हैं, और नगर निगम और एनआरआई का भी इसमें हिस्सा बढ़ गया है।
500 से अधिक सफाई मित्र तैनात
गेर के बाद सफाई व्यवस्था की पूरी तैयारी की जा चुकी है। 500 से अधिक सफाई मित्र गेर मार्ग की सफाई में जुटेंगे। प्रशासन ने रिकॉर्ड टाइम में सफाई करने के लिए पूरी टीम और संसाधन जुटाए हैं। साथ ही इस बार गेर के फोटो और वीडियो यूनेस्को को भेजे जाएंगे। भारत सरकार से निवेदन किया गया है कि यूनेस्को में गेर के आयोजन को दर्ज कराया जाए।
राजवाड़ा को रंगों से बचाने के लिए ये .उपाय
इंदौर की पहचान राजवाड़ा को रंगों से बचाने के लिए उसे ढक दिया गया है। इसके ऊपर बड़ा पीला प्लास्टिक लगाया गया है ताकि रंगों के कारण इसका नुकसान न हो। इसके अलावा, गोराकुंड और सराफा क्षेत्र में स्थित बिल्डिंग्स को भी प्लास्टिक से ढका गया है। कई लोग अपने घरों को रंगों से बचाने के लिए प्लास्टिक से कवर कर रहे हैं।
सुरक्षा और इमरजेंसी रूट की व्यवस्था
गेर के आयोजन के दौरान पुलिस ने पूरे रूट को 100 से 200 मीटर के सेक्टर में बांटकर सुरक्षा इंतजाम किए हैं। इमरजेंसी एग्जिट रूट भी बनाए गए हैं ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में जल्दी से बाहर निकला जा सके। साथ ही, हाइराइज की व्यवस्था भी की गई है।
कब हुई गेर की शुरुआत
गेर की शुरुआत 75 साल पहले इंदौर में हुई थी, जब प्रेमस्वरूप खंडेलवाल, बाबूलाल गिरी और सत्यनारायण सत्तन साहब ने मिलकर बैलगाड़ी से इस पारंपरिक आयोजन की शुरुआत की थी। समय के साथ गेर का स्वरूप बदल गया और अब यह आधुनिक साधनों जैसे डीजे, पानी के टैंकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ निकाली जाती है। आयोजकों का कहना है कि गेर का आयोजन अब केवल इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देशभर में इसकी पहचान बन गई है।
ये भी पढ़ें- मध्यप्रदेश सरकार की नई ड्रोन नीति : आइसर भोपाल में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ड्रोन बनाने और उड़ाने की ट्रेनिंग मिलेगी
One Comment