
बैंकॉक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के थाईलैंड दौरे का आज दूसरा दिन है। इस दौरान वे बैंकॉक में आयोजित BIMSTEC देशों की 6वीं समिट में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। थाईलैंड की प्रधानमंत्री पेइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस सम्मेलन में क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग, आतंकवाद, आपदा प्रबंधन और कनेक्टिविटी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। पीएम मोदी शुक्रवार को BIMSTEC शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे। यहां उनसे क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में भारत की भूमिका को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण घोषणाएं करने की उम्मीद है।
बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर से हो सकती है द्विपक्षीय बातचीत
BIMSTEC समिट के इतर प्रधानमंत्री मोदी और बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस के बीच द्विपक्षीय बातचीत की संभावना है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए तख्तापलट के बाद यह पहला मौका है जब भारत के प्रधानमंत्री और बांग्लादेशी सरकार के प्रमुख सलाहकार आमने-सामने आ रहे हैं। इससे पहले दोनों नेता बीती रात BIMSTEC डिनर में एक साथ नजर आए थे।
म्यांमार भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति पीएम मोदी ने जताई संवेदना
प्रधानमंत्री मोदी ने आज म्यांमार के सैन्य प्रमुख जनरल मिन आंग हलाइंग से भी मुलाकात की। इस दौरान म्यांमार में हाल ही में आए भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत हर संभव मदद के लिए तैयार है। यह मुलाकात भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है BIMSTEC
BIMSTEC की शुरुआत 1997 में हुई थी, जब थाईलैंड और भारत ने मिलकर एक ऐसा मंच बनाने की पहल की जो दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को जोड़ सके। ASEAN की सफलता के बावजूद भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को उसमें जगह नहीं मिल पाई थी। ऐसे में BIMSTEC एक ऐसा विकल्प बना जो क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दे सके।
SAARC से दूरी और BIMSTEC की ओर भारत का झुकाव
2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में SAARC देशों के नेताओं को आमंत्रित किया था, लेकिन इसके कुछ महीनों बाद SAARC समिट में पाकिस्तान द्वारा भारत की प्रस्तावित योजनाओं में अड़चनें डाली गईं। 2016 में ऊरी आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में होने वाली SAARC समिट में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद से SAARC लगभग निष्क्रिय हो गया है। वहीं BIMSTEC के जरिए भारत अब क्षेत्रीय सहयोग के एक नए और अधिक संभावनाशील मंच पर फोकस कर रहा है।
BIMSTEC में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर मतभेद
हालांकि BIMSTEC में एक समान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू करना अब तक संभव नहीं हो पाया है। भारत और थाईलैंड जैसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश 2004 से ही इसे लागू करने के पक्ष में हैं, लेकिन नेपाल, भूटान और म्यांमार जैसे छोटे देश इसके खिलाफ हैं। इन देशों को डर है कि FTA लागू होने से उनकी घरेलू इंडस्ट्रीज सस्ते आयात के दबाव में आ जाएंगी।