Naresh Bhagoria
19 Jan 2026
रियो डी जनेरियो। ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित 17वें BRICS सम्मेलन में सदस्य देशों ने आतंकवाद और वैश्विक चुनौतियों पर एकजुट रुख अपनाते हुए 31 पन्नों और 126 बिंदुओं वाला संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया। इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला सिर्फ भारत पर नहीं, पूरी मानवता पर हमला है।
सम्मेलन में ईरान पर हुए इजराइली हमले और भारत के पहलगाम हमले की खुलकर निंदा की गई। यह पहली बार है जब BRICS जैसे बड़े मंच पर भारत में हुए किसी आतंकी हमले को इस तरह की सख्ती के साथ ‘अत्यंत निंदनीय’ करार दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS समिट के मंच से कहा कि आतंकवाद की निंदा सुविधा नहीं, सिद्धांत होनी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को मानवता का सबसे बड़ा शत्रु बताते हुए कहा कि, 22 अप्रैल को पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ, वह भारत की आत्मा और गरिमा पर हमला था। जो देश आतंकवाद को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समर्थन करते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी चाहिए। राजनीतिक लाभ के लिए आतंक पर चुप रहना मानवता के साथ विश्वासघात है।
BRICS देशों ने एक स्वर में आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने पर जोर दिया। संयुक्त बयान में कहा गया:
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के मंच से ग्लोबल साउथ के देशों की समस्याओं और भेदभाव पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि, 20वीं सदी की वैश्विक संस्थाएं 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना नहीं कर पा रहीं। ग्लोबल साउथ को अक्सर विकास, संसाधनों और सुरक्षा में नजरअंदाज किया गया है। बिना नेटवर्क वाला मोबाइल फोन जैसे हैं ये संस्थाएं दिखती तो हैं, पर काम नहीं करतीं।
PM मोदी ने BRICS मंच पर कई ठोस और भविष्य की दिशा तय करने वाले सुझाव दिए:
PM मोदी और BRICS नेताओं ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में ग्लोबल साउथ को प्रभावी भूमिका देने की मांग दोहराई। चीन और रूस ने भारत और ब्राजील को UNSC में स्थायी सदस्य बनाने का समर्थन किया।
PM मोदी अब ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया की यात्रा पर हैं, जहां वे राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच 4 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे:
BRICS अब 11 देशों का समूह बन चुका है, जिनमें शामिल हैं- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इंडोनेशिया। इसका उद्देश्य इन देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है, और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना है।