
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने 2016 में हुई 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और इसमें सुधार की कोई संभावना नहीं है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने की। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
क्या है पूरा मामला?
2016 में पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की भर्ती के लिए स्टेट लेवल सेलेक्शन टेस्ट (SLST) आयोजित किया था। इसमें 24,640 रिक्त पदों के लिए 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था।
बाद में इस भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। आरोपों के मुताबिक, नौकरी दिलाने के लिए 5 से 15 लाख रुपए तक की रिश्वत ली गई। कोलकाता हाईकोर्ट को इस घोटाले से जुड़ी कई शिकायतें मिलीं, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
CBI और ED की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
इस घोटाले की जांच में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) और ED ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी मॉडल अर्पिता मुखर्जी, और स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) के कई अधिकारियों को गिरफ्तार किया।
मॉडल अर्पिता मुखर्जी के घर से भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी बरामद
- 22 जुलाई 2022 को ED ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों पर छापा मारा।
- अर्पिता के फ्लैट से 21 करोड़ रुपए नकद, 60 लाख रुपए की विदेशी करेंसी, और 20 मोबाइल फोन बरामद हुए।
- 24 जुलाई को ED ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया।
- बाद में 27.9 करोड़ रुपए नकद, 4.31 करोड़ रुपए के सोने और हीरे के गहने भी मिले।
CBI चार्जशीट और गिरफ्तारी
30 सितंबर 2024 को CBI ने इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और 16 अन्य लोगों के नाम शामिल थे। पार्थ चटर्जी 23 जुलाई 2022 से जेल में हैं और उनकी जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज हो चुकी है। इसके अलावा, TMC विधायक और स्टेट प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य को 11 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 4 अप्रैल की तारीख तय की है। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार को अब तीन महीने में नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस घोटाले से पश्चिम बंगाल की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।