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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी, गृह मंत्री बोले- वहां 4 महीने से शांति, विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- मणिपुर जल रहा है, पीएम कहा हैं ?

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी, गृह मंत्री बोले- वहां 4 महीने से शांति, विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- मणिपुर जल रहा है, पीएम कहा हैं ?
गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा और लोकसभा में गुरुवार को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव पेश किया। शाह ने कहा कि दिसंबर के बाद से वहां कोई हिंसा नहीं हुई है। साथ ही कैम्पों में खाने पीने और दवाइयों की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है। हालांकि इस प्रस्ताव को दोनों सदनों में मंजूरी मिल गई है। लेकिन इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा पर निशाना साधा है।  दरअसल, 2023 मई में मणिपुर में हिंसा भड़क गई थी, जिसके कुछ समय बाद फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री एन बीरेन ने इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया, लेकिन नियम के तहत 2 महीने के अंदर सरकार को दोनों सदनों से इसकी परमिशन लेनी पड़ती है

यह कोई दंगा या आतंकी हमला नहीं था- अमित शाह 

प्रस्ताव पेश करते हुए अमित शाह ने कहा- मणिपुर में हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद आरक्षण को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद बढ़ गया, जिससे जातीय हिंसा भड़क गई। यह न तो दंगा था और न ही आतंकी हमला। इस हिंसा में अब तक 260 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से 80% मौतें पहले महीने में हुई। जबकि बाकी लोग बाद में मारे गए। आगे उन्होंने कहा- ‘मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद मैतेई और कुकी दोनों कम्युनिटी के बीच 13 बार बातचीत हुई। गृह मंत्रालय जल्द दिल्ली में एक संयुक्त बैठक करेगा। सरकार हिंसा को समाप्त करने का रास्ता खोजने के लिए काम कर रही है।’

मणिपुर जल रहा, डबल इंजन सरकार पूरी तरह विफल- खड़गे

इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- मणिपुर जल रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी अब तक वहां नहीं गए। राज्य में यौन हिंसा की घटनाएं हुई, फिर भी भाजपा ने चुप्पी साध रखी है। भाजपा की डबल इंजन सरकार पूरी तरह विफल रही है। सदन को मणिपुर के लोगों को शांति का संदेश देना चाहिए, और प्रधानमंत्री को यह बताना चाहिए कि उन्होंने अब तक मणिपुर का दौरा क्यों नहीं किया। उन्हें वहां जाकर कानून व्यवस्था बहाल करनी चाहिए।

3 मुख्य बातों से दिया शाह ने विपक्ष के सवाल का जवाब 

  • जातीय हिंसा किसी एक सरकार तक सीमित नहीं रही है। 1993 से 1998 के बीच नागा-कुकी संघर्ष पांच साल तक चला, जिसमें 750 लोगों की जान गई, जबकि 1993 में मैतेई-पंगल हिंसा में 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
  • हालिया हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन इसे तुरंत काबू कर लिया गया। इससे पहले भी अलग-अलग सरकारों के दौरान लंबे समय तक हिंसा चलती रही, लेकिन उस वक्त किसी भी शीर्ष नेता या गृह मंत्री ने वहां दौरा नहीं किया।
  • 2017 में बीजेपी सरकार बनने के बाद मणिपुर में छह साल तक कोई जातीय हिंसा नहीं हुई। इससे पहले हर साल औसतन 212 दिन तक बंद और विरोध प्रदर्शन होते थे। 2017 से पहले 1,000 से ज्यादा एनकाउंटर हुए थे, जिनकी जांच सुप्रीम कोर्ट ने करवाई थी।
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Akriti Tiwary
By Akriti Tiwary

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