
मनीष दीक्षित-भोपाल। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की पत्नी मल्लिका, केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक की पुत्री निवेदिता, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पत्नी मृदुला, मनसुख मांडविया की अर्धांगिनी नीताबेन, गुना के पूर्व सांसद केपी यादव की पत्नी अनुराधा और भाजपा के प्रदेश महामंत्री शरदेन्दु तिवारी की सहधर्मिणी प्रवीण में क्या समानता है? जाहिर है, इनके पति भाजपा के शीर्ष पदों पर हैं। यह सभी भाजपा से जुड़ी हैं। इसके अलावा इनमें एक और समानता यह है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बजाय समाज के लिए कुछ अलग करने के लिए काम कर रही हैं।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने इनकी इसी कुछ अलग करने की चाहत को एक मंच मुहैया कराया है। इसके माध्यम से सभी महिलाएं बिना किसी ताम-झाम के समाज की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी की माताओं को संस्कारवान बनाने के यज्ञ में जुटी हैं। ‘विश्व मांगल्य सभा’ के बैनर तले यह प्रभावशाली महिलाएं, माता को प्रथम गुरु मान, बच्चों में भारतीय संस्कृति और संस्कार भरने की प्रेरणा भर रही हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन राव भागवत भी इस अभियान में रुचि ले रहे हैं। उनकी मुलाकात भी इस संस्था के शीर्ष पर बैठी 16 महिलाओं से हाल ही में हुई है। इस संस्था के अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारियों में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की पत्नी मंजू, उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक की पत्नी नम्रता, बंगाल के सांसद जगन्नाथ सरकार की पत्नी अर्पिता, दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी की पत्नी सुरभि, महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की पुत्रवधु धनश्री पाटिल, भाजपा सांसद डॉ. महेश शर्मा और राजीव प्रताप रूड़ी की पत्नियां शामिल हैं।
संस्था द्वारा आगामी 17 दिसंबर को काशी के नमो घाट पर देवी अहिल्या बाई के जीवन पर आधारित नाटिका का मंचन भी होना है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में भी 15 ऐसे आयोजन होने हैं, जो डॉ. मोहन यादव की सरकार के साथ सयुंक्त रूप से आयोजित होंगे।
मां ही जीवन का आधार, इसलिए केंद्र बिंदु में मां
विश्व मांगल्य सभा का मानना है कि एक महिला जीवन का आधार होती है। बच्चों को मां ही घर में अच्छे संस्कार दे सकती है। इससे आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी होगी, भविष्य भी उज्जवल होगा। इनके आयोजनों में भगवान शंकर की आराधना के अलावा उन महानुभवों के जीवन चरित्र पर भी प्रकाश डाला जाता है, जिनके महान बनने के पीछे उनकी मां की महत्वपूर्ण भूमिका थी। आयोजनों से भारतीय संस्कृति से अवगत कराते हुए बताया जाता है कि महिलाएं अपने बच्चों को कैसे शिक्षित करें और उनके साथ अधिक से अधिक समय बिताएं।
सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम की भी है चुनौती
अभियान में भाजपा सांसदों से लेकर पंचायत सदस्य तक की पत्नियों को शामिल किया जा रहा है, जो अपने क्षेत्र में सम्मानीय हों और जिनकी सक्रिय राजनीति में जाने की रुचि नहीं है। उन्हें बताया जाता है कि बच्चों को सुसंस्कार देने के लिए पहले स्वयं के व्यवहार में उन बातों का समावेश कर। सोशल मीडिया और बढ़ते स्क्रीन टाइम की चुनौती से निपटने के लिए माताओं को बच्चों के साथ ज्यादा समय व्यतीत करने को कहा जाता है। – प्रवीण तिवारी, विश्व मांगल्य सभा, महाकोशल प्रांत