
प्रवीण श्रीवास्तव-भोपाल। प्रदेश में खराब सड़कें अब और अधिक जानलेवा हो गई हैं। यहां हर दिन 450 से सड़क हादसे हो रहे हैं। यह आंकड़े जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेज 108 एंबुलेंस की पहली छमाही रिपोर्ट (जनवरी से जून ) से सामने आए हैं। इस अवधि में प्रदेश में 108 एंबुलेंस के कॉलसेंटर पर 88,255 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। मेडिकल कॉलेजों के ट्रॉमा इमरजेंसी विभाग के अनुसार 35% हादसे खराब सड़क और आवारा मवेशी, गड्ढों के कारण तो 24 फीसदी नशे में वाहन चलाने से होती हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे सागर (4298) में दर्ज किए गए। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में पहली छमाही में प्रदेश में 77, 406 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं।
80 प्रतिशत मौतें सिर पर गंभीर चोट लगने से
राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज की ट्रॉमा इमरजेंसी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटना के पीछे खराब सड़कें बड़ा कारण होती हैं। मरीजों के मुताबिक करीब 35 फीसदी दुर्घटनाएं सड़क पर गड्ढों और मवेशी के कारण होती हैं। इसके बाद नशा भी बड़ा कारण है। दुर्घटना के दौरान 80 फीसदी मृत्यु सिर में गंभीर चोट लगने से होती है।
भोपाल में 3,749 हादसों का शिकार हुए लोग
राजधानी होने के बावजूद भोपाल सड़क दुघर्टना के मामले में तीसरे स्थान पर रहा। यहां 3749 सड़क दुर्घटनाएं हुई। 108 एंबुलेंस से मिली जानकारी के मुताबिक इन हादसों में 70 फीसदी हादसे साफ मौसम में हुए। आसमान साफ होता है तो वाहन चालक दूर तक देख पाते हैं। ऐसे में स्पीड बढ़ा देते हैं। इस वजह से गड्ढे, मवेशी आने, नियंत्रण खो देने जैसी घटना हो जाती है।
छोटे जिलों में कम हादसे : उज्जैन में बीते साल (2287) के मुकाबले इस साल 2268 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसके साथ ही शिवपुरी, टीकमगढ़, कटनी, सीधी और सिंगरौली में 10 से 15 प्रतिशत की कमी आई है।
केस-1
11 अगस्त : कोलार इलाके में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की बाइक बीच सड़क पर बैठे आवारा मवेशी से टकरा गई थी। इस हादसे में युवक के सिर में गंभीर चोट आई थी और मवेशी के सींग लगने से उनकी जांघ में गहरा कट लगा था। राहगीरों ने एंबुलेंस से उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाया था।
केस-2
19 अगस्त : चौकसे नगर निवासी 24 वर्षीय अंशुल वर्मा नाइट शिफ्ट के बाद रात करीब 2:30 बजे बाइक से घर लौट रहेन थे। एमपी नगर चौहारे पर मेट्रो पुल के नीचे बारिश के कारण गड्ढे की गहराई का अंदाजा नहीं लगा और गिर गए। अंशुल को गंभीर स्थिति में हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सड़क हादसों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल दुर्घटना के मामले कहीं ज्यादा हुए हैं। इनमें खराब सड़कें भी बढ़ा कारण है। – तरुण सिंह परिहार, सीनियर मैनेजर, जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेज
फिलहाल सड़कों के गड्ढों को अस्थाई रूप से ही भरा जा रहा है। पानी रुकने के बाद सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए और गड्ढे हो ही नहीं, इसके लिए काम किया जाएगा। – राकेश सिंह, लोक निर्माण मंत्री