मप्र में पहली बार: भेड़ियों को लगाए जाएंगे कॉलर आईडी, प्रजाति बढ़ाने व आदतें जानने होगा अध्ययन

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मप्र में पहली बार: भेड़ियों को लगाए जाएंगे कॉलर आईडी, प्रजाति बढ़ाने व आदतें जानने होगा अध्ययन

संजय कुमार तिवारी- जबलपुर। मप्र में पहली बार भेड़ियों को रेडियो कॉलर आईडी लगाए जाएंगे। इससे पहले बाघ, हाथियों और चीतों को आईडी लगाए गए थे। इसकी शुरुआत नौरादेही अभयारण्य से होगी। यहां के तीन भेड़ियों को रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। भेड़ियों को लेकर यहां जबलपुर एसएफआरआई की एक टीम रिसर्च कर रही है। रिसर्च का उद्देश्य भेड़ियों की प्रजाति को बढ़ाना है। साथ ही यह भी पता किया जाएगा कि वे कैसे शिकार करते हैं, शिकार में क्या पसंद है, कब और कितने दिन में शिकार करते हैं। इनके रहवास, किस तरह झुंड में रहते हैं और कैसी इनकी दिनचर्या है।

सबसे ज्यादा भेड़िए मप्र में

2022 में भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा देशभर में भेड़ियों की गणना कराई गई थी। उसमें सबसे ज्यादा भेड़िए मप्र में मिले थे। मध्य प्रदेश में 772, राजस्थान में 532 और गुजरात में 494 भेड़िए पाए गए थे।

नौरादेही है प्राकृतिक आवास

खास बात ये है कि नौरादेही भारतीय भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के तौर पर जाना जाता है। अब यहां भेड़ियों के रहन-सहन और उनके रहवास की जानकारी एकत्रित की जाएगी।

वैज्ञानिक कर रहे रिसर्च

नौरादेही टाइगर रिजर्व के तीन भेड़ियों को पहली बार रेडियो कॉलर आईडी लगाए जाएंगे। जबलपुर एसएफआरआई के वैज्ञानिकों की एक टीम अनिरुद्ध मजूमदार के नेतृत्व में रिसर्च कर रही है। भेड़ियों की प्रजाति को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। तीन भेड़ियों को रेडियो कॉलर पहनाने की अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही इन्हें रेडियो कॉलर लगा दिए जाएंगे। -डॉ. एए अंसारी, डिप्टी डायरेक्टर, नौरादेही टाइगर रिजर्व

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