ब्रेन डेड मजदूर के अंगदान से दो मरीजों को नई जिंदगी, जबलपुर से इंदौर तक बना ग्रीन कॉरिडोर
Publish Date: 7 Mar 2025, 2:01 PM (IST)Reading Time: 3 Minute Read
जबलपुर के भेड़ाघाट निवासी 52 वर्षीय पूरन चौधरी की किडनी दान करने से दो मरीजों को जीवनदान मिला है। ऊंची दीवार से गिरकर गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। परिजनों की सहमति से उनकी दोनों किडनियां जरूरतमंद मरीजों को दान की गई। इनमें से एक किडनी इंदौर के बॉम्बे अस्पताल और दूसरी जबलपुर के मेट्रो अस्पताल भेजी गई।
ग्रीन कॉरिडोर के जरिए किडनी का सुरक्षित ट्रांसप्लांट
अंगदान की प्रक्रिया को तेज और सुचारू रूप से पूरा करने के लिए जबलपुर से इंदौर एयरपोर्ट तक 25 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। वहीं, दूसरी किडनी को मेट्रो अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 8 किमी का ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। इस दौरान पुलिस बल को तैनात किया गया ताकि एम्बुलेंस को बिना किसी बाधा के जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचाया जा सके। इंदौर से डॉक्टरों की एक विशेष टीम सुबह 6 बजे जबलपुर पहुंची थी और सुबह 10 बजे एयर एम्बुलेंस से किडनी को इंदौर रवाना किया गया।
परिजनों का फैसला, डॉक्टरों की पहल
पूरन चौधरी दो दिन पहले काम करते समय ऊंची दीवार से गिर गए थे, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उनके परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित किया, जिस पर परिवार ने सहमति दी।
स्वास्थ्य विभाग ने जरूरतमंद मरीजों की तलाश की तो पता चला कि जबलपुर की 50 वर्षीय सुदामा बाई और इंदौर के 56 वर्षीय नीरज सिंह को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत है। ग्रीन कॉरिडोर के जरिए सुरक्षित रूप से किडनियां भेजी गई, जिसके बाद मरीजों का ऑपरेशन किया गया।
लीवर दान की थी इच्छा, पर नहीं मिला जरूरतमंद
मृतक के भतीजे माधव राज ने बताया कि उनके पिता दीवार पर काम कर रहे थे, तभी तेज़ हवा के कारण संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर गए। इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोट आई और ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों की सलाह पर परिवार ने अंगदान का फैसला किया।
परिजनों ने उनकी दोनों किडनियां और स्किन दान कर दी, जबकि जल्द ही उनकी आंखें भी दान की जाएंगी। सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा के अनुसार, पूरन चौधरी के परिजनों ने लीवर दान करने की भी इच्छा जताई थी, लेकिन उपयुक्त जरूरतमंद मरीज न मिलने के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। उनकी त्वचा बर्न यूनिट में जरूरतमंद मरीजों और मेडिकल छात्रों के लिए उपयोग की जाएगी।
150 पुलिसकर्मियों की निगरानी में पूरा हुआ मिशन
ग्रीन कॉरिडोर के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 150 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। डीएसपी बी.एन. प्रजापति ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से इंदौर एयरपोर्ट तक बने ग्रीन कॉरिडोर में पुलिस की दो गाड़ियां एम्बुलेंस के साथ रहीं। प्रशासन, डॉक्टरों और पुलिस की टीम के बेहतरीन समन्वय से यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया। 
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