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चीतों के संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश-राजस्थान के बीच संयुक्त समिति का गठन, पर्यटन संभावनाओं पर होगा कार्य

भोपाल। मध्य प्रदेश से चीतों के पड़ोसी राज्य राजस्थान में भटकने की घटनाओं को देखते हुए दोनों राज्यों ने एक संयुक्त गलियारा (कॉरिडोर) प्रबंधन समिति का गठन किया है, जो चीतों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए काम करेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह समिति मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (केएनपी) और गांधी सागर अभयारण्य क्षेत्र से चीतों को सुरक्षित स्थानांतरण के लिए उपयुक्त क्षेत्रों का विकास करेगी और सुधार के उपायों पर चर्चा करेगी।

नामीबिया और साउथ अफ्रीका से लाए थे चीते

महत्वाकांक्षी चीता परियोजना के तहत 17 सितंबर, 2022 को श्योपुर जिले में केएनपी में 8 नामीबियाई चीतों को बाड़ों में छोड़ा गया। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को लाया गया। इस साल मई में केएनपी से एक चीता राजस्थान के करोली जिले में भटक गया था और बाद में उसे वापस मप्र लाया गया। दिसंबर 2023 में एक चीता राजस्थान के बारां जिले में भटक गया था और बाद में उसे वापस केएनपी लाया गया।

कॉरिडोर प्रबंधन और पर्यटन का अध्ययन

अधिकारी ने बताया कि चीता परियोजना के कॉरिडोर प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित की गई है। यह समिति चीतों की आवाजाही और संरक्षण के लिए कॉरिडोर के विकास और प्रबंधन के बारे में अध्ययन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर चर्चा करेगी और उसे तैयार करेगी।

डब्ल्यूआईआई के प्रतिनिधि होंगे शामिल

संयुक्त समिति इन चीतों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कॉरिडोर के प्रबंधन और विकास पर अध्ययन करेगी। इसमें दोनों राज्यों के अधिकारियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के प्रशिक्षण और निगरानी के कार्यों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही, चंबल घड़ियाल अभयारण्य, कूनो और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के बीच संयुक्त पर्यटन मार्गों की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

इस समिति के संयुक्त अध्यक्ष मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) होंगे। अन्य सदस्यों में दोनों राज्यों के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, शिवपुरी के निदेशक (बाघ परियोजना-चीता परियोजना), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

कूनो में हैं 24 चीते

अधिकारियों के अनुसार, केएनपी में पिछले दो वर्षों में भारतीय धरती पर 17 चीता शावकों का जन्म हुआ। हालांकि, इस परियोजना को कुछ नुकसान भी हुआ है, क्योंकि इसी अवधि में आठ वयस्क चीते और पांच शावकों की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में केएनपी में शावकों सहित 24 चीते हैं।

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