गाजा : हमले में अल जजीरा के 5 पत्रकारों की मौत, मशहूर रिपोर्टर अनस अल-शरीफ को IDF ने बताया हमास कमांडर

गाजा। गाजा शहर में अल-शिफा अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर पत्रकारों के लिए लगाए गए एक तंबू पर हुए इजराइली हवाई हमले में कम से कम पांच पत्रकारों की मौत हो गई। मृतकों में कतर के मीडिया नेटवर्क अल जजीरा के जाने-माने रिपोर्टर अनस अल-शरीफ भी शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इजराइल और हमास के बीच युद्ध 22वें महीने में प्रवेश कर चुका है और हालात बेहद तनावपूर्ण हैं।
हमला कैसे हुआ?
अल जजीरा के मुताबिक रविवार देर शाम (10 अगस्त 2025) गाजा शहर में अल-शिफा अस्पताल के मेन गेट के पास पत्रकारों का एक तंबू लगा था, जहां वे लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी तंबू को निशाना बनाकर इजराइली हवाई हमला किया गया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस हमले में कुल सात लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच पत्रकार और दो अन्य नागरिक शामिल थे।
मारे गए पत्रकारों के नाम
अल जजीरा ने पुष्टि की कि इस हमले में उनके संवाददाता मोहम्मद करीकेह, कैमरामैन इब्राहिम जहीर, मोहम्मद नौफल, मोआमेन अलीवा और रिपोर्टर अनस अल-शरीफ की मौत हुई। इन पत्रकारों के साथ एक सहायक भी मारा गया। गाजा में पत्रकारों के मारे जाने का यह सिलसिला जारी है, और अब तक युद्ध के दौरान करीब 237 पत्रकार अपनी जान गंवा चुके हैं।
अनस अल-शरीफ कौन थे?
28 वर्षीय अनस अल-शरीफ गाजा के नॉर्थ स्ट्रिप से अल जज़ीरा अरबी के लिए रिपोर्टिंग करते थे। उन्होंने अल-अक्सा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की थी और 2018 में ‘बेस्ट यंग जर्नलिस्ट अवार्ड’ जीता था। सोशल मीडिया पर उनके 5 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे और वे गाजा की जमीनी हकीकत को दुनिया तक पहुंचाने के लिए मशहूर थे।
हमले से कुछ ही मिनट पहले उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर गाजा पर हो रही तेज बमबारी का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “लगातार बमबारी हो रही है, दो घंटे से गाजा शहर पर इजराइली हमला तेज हो गया है।”
इजराइल का दावा- हमास के कमांडर थे अनस
इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने बयान जारी कर कहा कि अनस अल-शरीफ हमास के आतंकी संगठन में एक सेल के प्रमुख थे और इजराइली नागरिकों व सैनिकों पर रॉकेट हमलों की योजना बनाते थे।
अल जजीरा और पत्रकार संगठनों की प्रतिक्रिया
अल जजीरा ने इजराइली आरोपों को खारिज करते हुए इसे पत्रकारों को निशाना बनाने और सच दबाने की साजिश बताया। नेटवर्क का कहना है कि गाजा युद्ध शुरू होने से ही उनके पत्रकारों को धमकी और हमलों का सामना करना पड़ा है।
पत्रकार सुरक्षा समिति (CPJ) ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि बिना सबूत किसी पत्रकार को आतंकी कहना प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाता है। CPJ की डायरेक्टर सारा कुदाह ने कहा, “पत्रकार नागरिक होते हैं और उन्हें कभी निशाना नहीं बनाना चाहिए। जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।”
गाजा में बिगड़ते हालात
गाजा में 7 अक्टूबर 2023 से चल रहा युद्ध 22वें महीने में पहुंच चुका है। हालात इतने खराब हैं कि भोजन और दवाओं की भारी कमी है, और बड़ी संख्या में लोग भूखमरी का सामना कर रहे हैं।
पत्रकारों की सुरक्षा पर फिर सवाल
अनस अल-शरीफ की मौत ने एक बार फिर युद्ध क्षेत्र में काम कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक बहस छेड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गाजा में मीडियाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है। लेकिन जमीनी हालात और बढ़ते हमलों के बीच यह चुनौती और कठिन होती जा रही है।
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