
नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को बजट सत्र के आठवें दिन गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा हुई, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान कई उपयोगी सुझाव मिले, सरकार की कमियों पर ध्यान दिलाया गया और कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी की गईं। शाह ने कहा कि वह सभी का संसदीय भाषा में जवाब देने का प्रयास करेंगे।
2014 से पहले आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद था नासूर
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 सालों में देश में बहुत कुछ बदला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद गंभीर समस्याएं बनी हुई थीं। 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने इन तीनों मोर्चों पर मजबूती से मुकाबला किया।
जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल, सफल चुनाव भी हुए
गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर कहा कि विपक्ष के 33 साल के शासनकाल में वहां सिनेमाघर तक नहीं खुलते थे, लेकिन 2019 में जब आर्टिकल 370 हटाया गया, तो घाटी में बड़ा बदलाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि जी-20 सम्मेलन के लिए दुनियाभर के राजनयिक कश्मीर गए और हाल ही में वहां सफलतापूर्वक चुनाव भी कराए गए, जिसमें एक भी गोली नहीं चली।
उरी-पुलवामा हमलों का पाकिस्तान में घुसकर जवाब दिया
शाह ने कहा कि पहले जम्मू-कश्मीर में त्योहारों के दौरान आतंकी हमले आम बात थे। लेकिन मोदी सरकार आने के बाद इस पर कड़ा प्रहार किया गया। उरी और पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक की और यह साबित किया कि अब भारत कमजोर नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल इजराइल और अमेरिका ही इस तरह की जवाबी कार्रवाई करते थे, लेकिन अब भारत का नाम भी उन देशों की सूची में शामिल हो गया है।
लाल चौक पर हर घर तिरंगा
गृह मंत्री ने बताया कि पहले लाल चौक पर तिरंगा फहराने की अनुमति नहीं मिलती थी, लेकिन अब वहां के हर घर पर तिरंगा लहराता है। उन्होंने याद दिलाया कि मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में जब यात्रा निकाली गई थी, तब सेना की सुरक्षा में आनन-फानन में तिरंगा फहराकर लौटना पड़ा था। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं और हर घर तिरंगा अभियान के तहत वहां के हर घर पर तिरंगा दिखाई देता है।
अब आतंकियों के जनाजों में जुलूस नहीं निकलते
शाह ने कहा कि सरकार के प्रभावी कदमों की वजह से अब भारतीय युवाओं की आतंकवाद से जुड़ने की संख्या लगभग शून्य हो गई है। उन्होंने बताया कि पहले जब कोई आतंकी मारा जाता था, तो बड़े-बड़े जुलूस निकाले जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। अब आतंकियों को वहीं दफना दिया जाता है, जहां वे मारे जाते हैं।
आतंकियों के परिवार वालों पर भी कड़ी कार्रवाई
गृह मंत्री ने कहा कि पहले जब किसी परिवार का सदस्य आतंकवादी बन जाता था, तो उसके परिवार के अन्य सदस्य आराम से सरकारी नौकरियों में बने रहते थे। लेकिन सरकार ने उन सभी को बाहर करने का काम किया है। उन्होंने बताया कि पहले बार काउंसिल और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में भी आतंकियों के परिवार के लोग शामिल होते थे और विरोध प्रदर्शन करते थे, लेकिन अब वे श्रीनगर या दिल्ली की जेलों में हैं।
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