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Holi 2025 : राजस्थान का 600 साल पुराना चामुंडा माता मंदिर, जहां मुस्लिम परिवार है मुख्य पुजारी, होली के दिन होती है खास पूजा…

टोंक। भारत अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। इसकी सबसे अनूठी मिसाल देखने को मिलती है राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा ब्लॉक के नगर गांव में स्थित 600 साल पुराने चामुंडा माता मंदिर में, जहां हिंदू देवी-देवताओं की पूजा कोई हिंदू नहीं, बल्कि एक मुस्लिम परिवार करता आ रहा है।

यह मंदिर न केवल हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और सामाजिक सौहार्द का भी गवाह है। हर साल होली के अवसर पर पूरा गांव यहां इकट्ठा होता है और खास बात यह है कि मंदिर की पूजा-अर्चना का जिम्मा एक मुस्लिम पुजारी संभालते हैं।

600 साल पुराना है चामुंडा माता का मंदिर

नगर गांव में ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर की ऐतिहासिकता 600 साल पुरानी बताई जाती है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, इस मंदिर की देखभाल और पूजा-पाठ की जिम्मेदारी सैकड़ों सालों से मुस्लिम परिवारों के पास रही है। यहां रहने वाला दाढ़ी मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से इस मंदिर की सेवा करता आ रहा है। मंदिर में हर दिन पूजा-अर्चना होती है और विशेष रूप से होली के दिन यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

मुस्लिम पुजारी शंभू करते हैं चामुंडा माता की पूजा

इस मंदिर के मुख्य पुजारी का नाम शंभू है, लेकिन वह धर्म से मुस्लिम हैं। शंभू बताते हैं कि उनका परिवार सदियों से इस मंदिर की सेवा कर रहा है और वे इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। मंदिर से जुड़ी परंपरा के अनुसार, पूजा करने वाले पुजारी का नाम हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार रखा जाता है, इसलिए वे शंभू कहलाते हैं। उनके परिवार के करीब 100 सदस्य इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि गांव के लोग कभी उन्हें मुस्लिम नहीं मानते, बल्कि उन्हें मंदिर के पुजारी के रूप में ही देखते हैं।

माता रानी इस सेवा से खुश हैं- भक्त

गांव के लोग मानते हैं कि चामुंडा माता का यह मंदिर पूरे क्षेत्र की रक्षा करता है और मुस्लिम पुजारियों द्वारा की गई पूजा से माता रानी प्रसन्न होती हैं। स्थानीय निवासी शंकर सिंह कहते हैं कि यह मंदिर हमेशा से आस्था का केंद्र रहा है। गांव के रतनलाल कहते हैं कि माता रानी इस परिवार की सेवा से खुश हैं, इसलिए हमारे गांव में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। मंदिर में पूजा-पाठ से लेकर आरती तक की सारी रस्में परंपरागत रूप से निभाई जाती हैं।

होली पर मंदिर में लगता है मेला

होली के मौके पर इस मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है और यहां मेला भी लगता है। 11 गांवों के लोग इस अवसर पर माता के दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। मंदिर के मुस्लिम पुजारी को इन गांवों के लोग हर साल 11 किलो अनाज भेंट करते हैं, जिससे उनके परिवार का गुजारा चलता है। गांव के लोगों का कहना है कि मंदिर और पुजारी के प्रति हमारी आस्था अटूट है और यह हिंदू-मुस्लिम एकता की सबसे बड़ी मिसाल है।

गांव के लोग यह भी मानते हैं कि धर्म से पहले इंसानियत होती है और यही कारण है कि यहां कभी सांप्रदायिक तनाव देखने को नहीं मिला। नगर गांव में स्थित मस्जिद और मंदिर, दोनों का समान रूप से सम्मान किया जाता है और हिंदू-मुस्लिम एकता का यह अद्भुत संगम पूरे देश के लिए मिसाल है।

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