
पुष्पेन्द्र सिंह-भोपाल। देश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम बनने के बाद 2 फरवरी 2006 से योजना प्रारंभ हुई। पहले चरण में देशभर के 200 सबसे पिछड़े जिलों को शामिल किया गया। दूसरे चरण में और 130 जिले और वर्ष 2008 में 1 अप्रैल से सभी जिले कवर किए गए। सरकार 6,790 दिन (12 अगस्त 2024 तक) यानी 18 साल से मजदूरों को 100 दिन काम की ही गारंटी दे रही।
मप्र में मजदूरी राशि पांच साल में महज 53 रुपए बढ़ी है। मप्र में यह दर 243 रुपए निर्धारित है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि रोजगार की गारंटी 100 दिन से अधिक नहीं बढ़ेगी और न ही इस साल मजदूरी दर में कोई बढ़ोत्तरी की जाएगी। यही कारण है कि प्रदेश में काम मांगने वाले मजदूरों की संख्या में निरंतर गिरावट आ रही है। ये मजदूर दूसरे प्रदेशों में बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं।
मजदूर हंसराज की व्यथा
‘मेरा नाम हंसराज केवट उर्फ कमल लाचारी है, उम्र 33 साल है। सीधी जिले के रामपुर नैकिन ब्लॉक के ग्राम गुजरेड में रहता हूं। साल 2011 में आईआईटी में 81 प्रतिशत अंक लाकर सिंगरौली जिला टॉप किया था। नौकरी नहीं मिली तो मनरेगा में मजदूरी करने लगा। रोज 240 रुपए मिलते हैं, इतने में तीन बच्चों और पत्नी का खर्च चल पाना संभव नहीं। बारिश में चार माह काम बंद रहता है, मजदूरी समय पर नहीं मिलती।
अन्य राज्यों की मजदूरी दर
अगर हम अन्य राज्यों की मजदूरी दर पर नजर डालें तो हरियाणा में 374, आंध्र प्रदेश में 300, केरल 346, कर्नाटक में 349 और पंजाब में 322 मजूदरी दर है।
चेतन्य कृष्ण, सीईओ, मनरेगा
- मजदूरी बढ़ाने का अधिकार राज्य को भी है, कभी बढ़ाई क्या। –मजदूरी बढ़ाने का विकल्प है, लेकिन कभी वृद्धि नहीं की।
- केंद्र से मजदूरी बजट भी घट रहा है –मानव दिवस के आधार पर मजदूरी राशि मिलती है
- प्रदेश में मजदूर कम हो रहे हैं –मनरेगा में डिमांड आधार पर रोजगार देने का प्रावधान है
- कितने मजदूरों की राशि अटकी है –बिलकुल नहीं, सामग्री के जरूर एक हजार करोड़ केंद्र से मिलने हैं।