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दमोह : फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट को घबराहट के चलते लाया गया अस्पताल, ब्लड प्रेशर बढ़ा, कोर्ट ने भेजा जेल

दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह में कुछ दिन पहले सुर्खियों में आए कथित फर्जी कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ नरेंद्र यादव उर्फ एन जॉन केम को घबराहट की शिकायत पर जिला अस्पताल लाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। दमोह के मिशन अस्पताल में 7 मरीजों की मौत के आरोपी डॉ. नरेंद्र यादव को कोर्ट ने 1 मई तक जेल भेज दिया है।

रिमांड पूरी होने पर किया कोर्ट में पेश

दरअसल, पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद शुक्रवार शाम 4:30 बजे उसे कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने आरोपी एन जॉन केम को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया था। जहां कोर्ट ने एक दिन की रिमांड और बढ़ाई थी। आरोपी डॉक्टर के वकील सचिन नायक ने कोर्ट से कहा कि पुलिस पूछताछ पूरी हो चुकी है। अब क्लाइंट की प्रत्यक्ष रूप से आवश्यकता नहीं है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी और मोबाइल इस्तेमाल की अनुमति मांगी है।

देर रात बिगड़ी तबियत

जिला अस्पताल सूत्रों के अनुसार डॉ नरेंद्र यादव को गुरुवार देर रात तबियत बिगड़ जाने के कारण जिला अस्पताल लाया गया। उसे उल्टियां और घबराहट होने पर डॉक्टर ने चेकअप किया। जिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मधुर चौधरी ने आरोपी डॉक्टर का चेकअप किया। उस दौरान आरोपी डॉक्टर का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था एवं उसे उल्टियां भी हो रही थी। डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार करते हुए उसे कुछ समय के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया और देर रात छुट्टी दे दी। जिला अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक आरोपी डॉक्टर को किसी भी प्रकार की कोई बीमारी नहीं है। सिर्फ ब्लड प्रेशर बढ़ने से घबराहट हो रही थी।

7 मरीजों की मौत का आरोप

मिशन अस्पताल पर हाल ही में सात मरीजों की मौत के आरोप भी लगे थे। हालांकि प्रशासन की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मौतें किस वजह से हुईं, लेकिन लापरवाही के गंभीर आरोपों को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है।

दरअसल, यह अस्पताल 6 अप्रैल को उस समय चर्चा में आया था, जब पता चला कि यहां के एक डॉक्टर डॉ. नरेंद्र यादव लंदन के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एन जॉन केम के नाम पर ढाई महीने में 15 हार्ट की सर्जरी कर चुके हैं। आरोप है कि दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हुए इन ऑपरेशनों में 7 मरीजों की मौत हो चुकी। उस समय सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन और डीएचओ डॉ. विक्रम चौहान ने जांच में दो मौतों की पुष्टि की थी। मामले का खुलासा होने के बाद आरोपी डॉ. नरेंद्र यादव फरार हो गया था। इसके बाद उसे प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया था।

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