आखिरकार भोपाल, ग्वालियर सहित 5 शहरों में कूड़ा-करकट से बनेगी बिजली
सफाई के साथ कमाई... पॉलीथिन से मिलेगा छुटकारा

अशोक गौतम-भोपाल। जबलपुर और रीवा नगर निगम में कचरे से बिजली बनाने के सफल संचालन से अब ग्वालियर, रतलाम, इंदौर ,उज्जैन और सागर नगर निगम भी पावर संयंत्र लगाने की तैयारी कर रहा है। ये सभी शहर 6 मेगावाट से लेकर 12 मेगावाट तक प्रति दिन बिजली उत्पादन करने लिए संयंत्र स्थापित की डीपीआर तैयार कर रहे हैं। संयंत्रों में 50 माइक्रान या उससे कम की पॉलीथिन और सूखे कचरे से बिजली तैयार होगी।
भोपाल में कचरे से बिजली बनाने की प्लानिंग आदमपुर छावनी में हुई थी पर काम में देरी से निगम ने 2016 में कंपनी का एग्रीमेंट समाप्त कर दिया था जिससे योजना ठप हो गई थी वर्तमान में जबलपुर में सूखे कचरे से 11 और रीवा में 6 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। जबलपुर ननि ने महाराष्ट्र, गुजरात और रीवा ने इलाहाबाद (यूपी) से भी कचरा लेने का अनुबंध किया है।
सीमेंट उद्योगों को दे रहे कचरा
प्रदेश में 408 नगरीय निकाय हैं। सभी निकायों में लाखों टन सूखा कचरा निकल रहा है। 90 फीसदी निकाय सीमेंट उद्योगों को अपना कचरा दे रहे हैं। इसमें 50 माइक्रान की पॉलीथिन को सीमेंट उद्योगों को दिया जाता है, इससे अधिक माइक्रान की प्लास्टिक कचरे को उद्योगों को री-यूज के लिए बेच दिया जाता है।1 साल में इतना प्लास्टिक वेस्ट
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में एक साल में 1,38,483 मीट्रिक टन प्लास्टिक वेस्ट निकला है। इंदौर में 60,000 तो भोपाल में 25,288.4 मीट्रिक टन वेस्ट निकला।कचरे से कैसे बनती है बिजली
- ये दो तरीके से बनती है। पहला- अपशिष्ट (ईंधन) को जलाया जाता है, जिससे गर्मी निकलती है। यह गर्मी बॉयलर में पानी को भाप में बदल देती है। उच्च दबाव वाली भाप टर्बाइन जनरेटर के ब्लेड को घुमाकर बिजली पैदा करती है।
- दूसरा- ज्वलनशील कचरे को प्रोजेक्ट में लगे भट्ठे में जलने के लिए डाला जाता है, जहां कचरे के जलने से उत्पन्न ऊष्मा से उस भट्ठे से जुड़ी सोलर प्लेट गर्म होती है और बिजली आपूर्ति शुरू हो जाती है।





















