ई-पासपोर्ट को 2025 के मध्य तक पूरे देश में लागू किए जाने की उम्मीद है। इसे 1 अप्रैल 2024 को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किया गया था। सरकार पासपोर्ट धारकों के डेटा को सुरक्षित रखने और डुप्लीकेशन से बचने के लिए इसे लेकर आई है। ई-पासपोर्ट एक डिजिटल तकनीक से लैस पासपोर्ट होता है, जिसमें एक छोटा RFID चिप और एंटीना लगा होता है। इस चिप में पासपोर्ट होल्डर की पर्सनल और बायोमेट्रिक जानकारी होती है, जैसे – नाम, जन्मतिथि, फोटो, उंगलियों के निशान और आईरिस स्कैन।
ई-पासपोर्ट की पहचान इसके कवर पेज पर बने गोल्डन रंग के छोटे से सिंबल से की जा सकती है।
नाबालिग के लिए
वयस्कों के लिए
नहीं, मौजूदा पासपोर्ट उसकी वैधता खत्म होने तक मान्य रहेगा। ई-पासपोर्ट सिर्फ नए अप्लिकेशन और रिन्युअल के समय मिलेगा।
अभी ये सुविधा नागपुर, भुवनेश्वर, जम्मू, गोवा, शिमला, रायपुर, अमृतसर, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद, सूरत और रांची में उपलब्ध है। तमिलनाडु में भी 3 मार्च 2025 से यह सुविधा शुरू हो चुकी है।
सरकार ने ई-पासपोर्ट का डेटा नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा संचालित सिक्योर डेटाबेस में स्टोर किया है, जो पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित है।
दिसंबर 2024 तक 174 देशों में ई-पासपोर्ट जारी करने की सुविधा थी। भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।