
राजीव सोनी-भोपाल। आयकर विभाग ने मप्र और छत्तीसगढ़ की ऐसी गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) को निशाने पर लिया है जो आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत टैक्स छूट का दुरुपयोग कर रही हैं । सामाजिक, धार्मिक, स्वास्थ्य और शैक्षणिक क्षेत्र में चैरिटी के नाम पर टैक्स की छूट का गलत फायदा लेने पर 100 से अधिक संस्थाओं के सर्टिफिकेट कैंसिल कर वसूली कार्रवाई शुरू की गई है। इसमें विभाग एआई तकनीक का सहारा भी ले रहा है।
रूटीन छानबीन में कई संस्थाएं मिलीं दागदार
आयकर अधिनियम की 10(23), 11,12, 13, 12एबी और 80 जी सहित टैक्स छूट संबंधी अन्य धाराओं के दायरे में पंजीकृत एनजीओ की रूटीन छानबीन में कई संस्थाएं दागदार मिली हैं। ऐसे सभी मामलों में आईटी एक्ट की धारा 148 के तहत फाइल खोलकर जांच शुरू कर दी। फर्जीवाड़ा साबित होने पर संस्थाओं की मान्यता रद्द कर उनके द्वारा अब तक टैक्स में ली गई छूट की वसूली शुरू की गई है। दोषी संचालकों पर प्रासीक्यूशन की कार्रवाई की जा रही है।
मिल रहीं खुफिया सूचनाएं
आईटी को टैक्स चोरी और आयकर छूट के दुरुपयोग संबंधी खुफिया सूचनाएं कई स्त्रोतों से मिल रही हैं। इनसाइड पोर्टल के अलावा नॉन फाइलर एनजीओ, बैंकों से मिलने वाले हाई रिस्क ट्रांजेक्शन और नीति आयोग सहित विदेशी फंडिंग के इनपुट्स आदि मुख्य हैं। इनके अलावा एमएचए, यूजीसी, एनएमसी, एआईसीटीई और सीबीएसई जैसी संस्थाएं भी आयकर विभाग को निरंतर जानकारियां दे रही हैं। विभाग का दावा हे कि उनकी नजर से कोई नहीं बच सकता।
इन संस्थाओं पर नकेल
कुछ मामले ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों के सुपुर्द भी किए गए । बोगस खर्चे और चैरिटी के बजाए दान की राशि के दुरुपयोग पर आयकर ने कई संस्थाओं विशेष पर कार्रवाई भी की है।
- दावत-ए-इस्लामी रायपुर (टेरर फंडिंग)।
- नागपुर डायोसेशन बोर्ड ऑफ एजुकेशन(विदेशी फंडिंग)।
- जबलपुर में बिशप पीसी सिंह पर ईडी की कार्रवाई ।
- मैक्रो विजन एकेडमी बुरहानपुर पर आयकर का छापा।
धारा 12 ए में छूट पाने का नियम एनजीओ पर टैक्स पर छूट तभी मिलती है जब वह धारा 12ए और 80जी में रजिस्टर्ड हो। अगर यह एनजीओ किसी खास जाति या समुदाय के लिए काम करता है तो 12 ए के तहत छूट नहीं दी जाएगी। एनजीओ चलाने के साथ कोई बिजनेस या व्यापार करते हैं तो छूट का लाभ नहीं मिलेगा। छूट के लिए एनजीओ की कमाई का 85 फीसदी हिस्सा जन कल्याण जैसे शिक्षा, मेडिकल, स्वास्थ्य से जुड़े काम पर करना होगा।