
हेल्थ डेस्क। कोरोना संक्रमण के कारण अब तक कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आई हैं। जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी थी। एक बार फिर से कोरोना का खतरा वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ता हुआ देखने को मिल रहा है। वह है ओमिक्रॉन का नया सब-वैरिएंट JN.1, इस वैरिएंट के मामले भारत सहित कई देशों में देखने को मिल रहे हैं। इन सभी के बीच एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने बताया है कि कोरोना का संक्रमण स्वाद और गंध के बाद अब गले की आवाज भी छीन सकता है। आइए जानते हैं क्या लिखा है रिसर्च में…
धीरे-धीरे आवाज छीन रहा है कोरोना
जर्नल पीडियाट्रिक में Bilateral vocal cord paralysis requiring long term tracheostomy after SARS-CoV-2 infection नाम से एक रिसर्च प्रकाशित हुई है। यह रिसर्च बताती है कि कोरोना के कारण सिर्फ स्वाद और गंध ही नहीं, गले की आवाज भी जा सकती है। इसे वोकल कॉर्ड पैरालिसिस कहते हैं। जिसका मतलब होता है वोकल कार्ड (आवाज की नली) में लकवा होना, जिससे आवाज धीरे-धीरे चली जाती है।
वोकल कॉर्ड पैरालिसिस का पहला मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक 15 वर्षीय किशोरी SARS-CoV-2 वायरस से संक्रमित हुई थी। लेकिन, कुछ दिनों बाद अचानक से उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। जिसके बाद उसे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। लड़की को बोलने में भी दिक्कत हो रही थी। यह एक गंभीर मामला था, जिस पर रिसर्च करने के बाद पता चला कि उसे वोकल कॉर्ड पैरालिसिस हो गया है। लड़की को पहले से ही अस्थमा और एंग्जाइटी की समस्या भी रही है।
रिसर्चर ने इस केस के बारे में बताया कि इसकी इंडोस्कोपिक जांच में पाया गया है कि लड़की के वॉयस बॉक्स में पाए जाने वाले दोनों वोकल कॉर्ड में ये दिक्कत आई है। जिसके बाद उसकी आवाज चली गई है।
क्या है रिसर्च का निष्कर्ष?
रिसर्च के निष्कर्ष में स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है, यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिन रोगियों के पहले से ही अस्थमा या न्यूरोलॉजिकल समस्या रही है, उन्हें इसका खतरा ज्यादा है। इसके लिए कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान ही डॉक्टरों को न्यूरोलॉजी-मनोचिकित्सा आदि पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। जिससे ये मामले सामने न आए।
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