
भोपाल। देश में डिजिटल अरेस्ट कर ठगी के कई मामले सामने आ रहे हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक नया और गंभीर रूप है, जिसमें ठग ऑनलाइन माध्यम से लोगों को धमकाते हैं कि वे किसी सरकारी एजेंसी द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए हैं। इसके बाद जुर्माने या फीस के नाम पर उनसे पैसों की मांग की जाती है। प्रदेश में बढ़ते मामलों के बीच मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्टेट साइबर सेल का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ साइबर सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के उपायों पर चर्चा की।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी “मन की बात” कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट की घटना का जिक्र किया और उन्होंने इससे बचने के लिए देशवासियों से ‘रूको, सोचो और एक्शन लो’ का मंत्र साझा किया था।
हर थाने में बनेगी साइबर डेस्क
सीएम डॉ. मोहन यादव भोपाल के डिपो चौराहा स्थित साइबर सेल ऑफिस पहुंचे और उन्होंने साइबर फ्रॉड को लेकर अधिकारियों से चर्चा की। साथ ही सीएम कहा ने कि पुलिस साइबर क्राइम रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में साइबर अपराध रोकथाम के लिए पुलिस की सराहना और भविष्य में इसे और प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर थाने में साइबर डेस्क स्थापित की जाएगी और साइबर जागरुकता अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा, ताकि नागरिकों को डिजिटल फ्रॉड से बचाया जा सके।
दुबई के कारोबारी को 6 घंटे किया डिजिटल अरेस्ट
मुख्यमंत्री ने बीते दिनों हुई ‘डिजिटल अरेस्ट’ की घटना का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेश के लिए एक अनूठा अनुभव बताया। दुबई के एक कारोबारी ओबरॉय को ऑनलाइन फ्रॉड के तहत 6 घंटे के लिए “डिजिटल अरेस्ट” का शिकार बनाया गया। साइबर अपराधियों ने उन्हें धोखाधड़ी का शिकार करने का प्रयास किया, लेकिन मध्यप्रदेश की साइबर पुलिस की सतर्कता से इस घटना को लाइव रेस्क्यू कर लिया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया, अपराधियों ने कारोबारी से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया और हमारी असली पुलिस की पहचान मांगने की हिम्मत तक की। लेकिन पुलिस टीम की मुस्तैदी से आरोपी मौके से भाग निकले। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट की घटना का जिक्र किया और मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों की सराहना की।
दुबई के कारोबारी से बातचीत
मुख्यमंत्री ने डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुए दुबई के कारोबारी ओबरॉय से फोन पर बातचीत कर उन्हें आश्वासन दिया कि मध्यप्रदेश सरकार और पुलिस उनकी हर संभव मदद के लिए तत्पर है।
सीएम ने जनता को दी सतर्क रहने की सलाह
सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई आधिकारिक प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई इस तरह का दावा करें तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। पुलिस आपकी सहायता के लिए तत्पर है। प्रदेश में साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए हमारी पुलिस लगातार सक्रिय है। डिजिटल जागरूकता और सुरक्षा को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है। जनता को जागरूक रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को देनी चाहिए।
पीएम ने दिए डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए तीन मंत्र
प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 150वीं कड़ी में देश में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड के मुद्दे पर बात की थी। उन्होंने इससे बचने के लिए देशवासियों से तीन महत्वपूर्ण मंत्र साझा किए थे।
- रूको- जब भी आपको किसी संदिग्ध कॉल या संदेश के माध्यम से धमकी दी जाए, तो घबराएं नहीं और जल्दबाजी में कोई भी कदम न उठाएं। अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें।
- सोचो- इस स्थिति में खुद से सवाल करें कि क्या कोई सरकारी एजेंसी इस प्रकार से फोन या वीडियो कॉल पर संपर्क करेगी? अगर ऐसा कॉल संदिग्ध लगे, तो समझें कि यह फरेब हो सकता है।
- एक्शन लो- प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क करने की सलाह दी। साथ ही, इस तरह की घटनाओं की रिपोर्ट साइबर क्राइम की वेबसाइट पर करने और परिवार तथा पुलिस को सूचित करने का आग्रह किया।
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