
वॉशिंगटन। अमेरिका में बर्ड फ्लू वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच वैज्ञानिकों ने खोज में पाया है कि गायों के दूध में मौजूद बर्ड फ्लू (H5N1) वायरस पर अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली एंटीवायरल दवाएं कारगर नहीं हो रही हैं। यह वायरस न सिर्फ दूध में मिला है, बल्कि इससे जुड़े डेयरी वर्कर्स में संक्रमण के मामले भी सामने आ रहे हैं।
बर्ड फ्लू वायरस के नए खतरे
यूएस के सेंट जूड चिल्ड्रन रिसर्च हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने बताया कि दूध में मौजूद वायरस के संपर्क में आने पर वर्कर्स की आंख, नाक और मुंह के जरिए संक्रमण हो रहा है। कच्चा दूध पीना या इसका संपर्क वायरस का खतरा बढ़ा सकता है।
FDA ने दी दवाओं को मंजूरी
चूहों पर किए गए एक अध्ययन में पाया कि फ्लू के लिए एफडीए द्वारा स्वीकृत दो प्रमुख एंटीवायरल दवाएं (तमिफ्लू और जॉफ्लूजा) इस वायरस के खिलाफ प्रभावी नहीं हैं। इस शोध के नतीजे नेचर माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में पब्लिश हुए हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, जॉफ्लूजा ने वायरस को कंट्रोल करने में थोड़ा बेहतर काम किया, लेकिन फिर भी यह हर स्थिति में प्रभावी नहीं रही। वैज्ञानिकों ने बताया कि वायरस के शरीर में पहुंचने का तरीका भी इलाज की प्रभावशीलता को प्रभावित करता है।
कच्चे दूध का न करें सेवन
वैज्ञानिकों ने बताया कि मुंह के जरिए संक्रमणसे सबसे गंभीर संक्रमण हुआ, जिसे कंट्रोल करना बेहद कठिन था। वहीं, आंख के जरिए संक्रमण में जॉफ्लूजा अधिक प्रभावी साबित हुई। मुख्य शोधकर्ता रिचर्ड वेबी ने चेतावनी दी कि बर्ड फ्लू का इलाज करना मुश्किल हो सकता है, खासकर जब संक्रमण गंभीर हो जाए। उन्होंने कहा कि संक्रमण का खतरा कम करने कच्चे दूध का सेवन न करना और डेयरी वर्कर्स को संक्रमण से बचाने के लिए सुरक्षात्मक उपाय अपनाने चाहिए।