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भोपाल में वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में जश्न, मुस्लिम महिलाओं ने कहा- ‘थैंक्यू मोदी जी’, आरिफ मसूद बोले- ये स्पॉन्सर्ड कार्यक्रम

भोपाल। वक्फ संशोधन बिल 2025 बुधवार को लोकसभा में पास हो गया। करीब 11 घंटे चर्चा के बाद हुई वोटिंग में बिल के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। अब यह बिल गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व और प्रबंधन को पारदर्शी बनाना और इससे जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए कानूनी विकल्प प्रदान करना है। इस विधेयक को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले।

भोपाल में मुस्लिम महिलाओं ने जताई खुशी

भोपाल में वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में आनंदपुरा और कोकता इलाके में बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं ने गुलाब के फूल लेकर और ‘थैंक यू, मोदी जी’ तथा ‘वी सपोर्ट मोदी जी’ लिखी तख्तियां थामकर खुशी जताई। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की धुन पर जश्न मनाया गया और आतिशबाजी भी की गई। हथाई खेड़ा डैम के पास भी इसी तरह का नजारा देखने को मिला, जहां मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने जताई आपत्ति

विधायक आरिफ मसूद ने इस जश्न को भाजपा का प्रायोजित कार्यक्रम करार देते हुए कहा कि, यह विधेयक सिर्फ मुस्लिम समाज को परेशान करने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि, कलेक्टर को इसमें जिम्मेदार बनाया गया है, जबकि वही कलेक्टर कई कब्रिस्तानों को सरकारी संपत्ति घोषित कर चुका है। मसूद ने कहा कि वे इस विधेयक के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ेंगे।

सीएम ने किया विधेयक का समर्थन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक मुस्लिम समुदाय सहित पूरे देश के हित में लाया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह विधेयक न्यायपालिका को अधिक शक्तियां प्रदान करता है, जिससे किसी के भी कानूनी अधिकारों का हनन नहीं होगा। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दल केवल मुस्लिम समाज को वोट बैंक के रूप में देखते हैं और उनकी भलाई के लिए काम नहीं करते।

विधायक रामेश्वर शर्मा बोले- संपत्तियां सही हाथों में होनी चाहिए

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि भोपाल के आरिफ नगर में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का गलत तरीके से सौदा किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पहले उनके सांसद और अब विधायक इस संपत्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन संपत्तियों का उपयोग गरीबों के कल्याण और शिक्षा के लिए हो।

मंत्री विश्वास सारंग का बयान- विधेयक किसी के खिलाफ नहीं

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि भोपाल में मुस्लिम समाज द्वारा इस विधेयक के समर्थन में आगे आना उन लोगों के लिए करारा जवाब है, जो इसे लेकर गुमराह करने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक तुष्टिकरण की राजनीति का अंत करेगा और मुस्लिम समाज की बेहतरी के लिए काम करेगा।

वक्फ संशोधन विधेयक 2025- क्या हैं प्रमुख प्रावधान?

  • न्यायिक अपील की प्रक्रिया आसान- अब ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी।
  • भूमि स्वामित्व के स्पष्ट नियम- जब तक कोई संपत्ति वक्फ को दान नहीं की जाती, वह स्वतः वक्फ संपत्ति नहीं मानी जाएगी।
  • महिलाओं और अन्य धर्मों के लोगों को प्रतिनिधित्व- वक्फ बोर्ड में दो महिलाओं और अन्य धर्मों के दो लोगों को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
  • विवादित संपत्तियों पर दावा- अब ट्रिब्यूनल के अलावा, रेवेन्यू कोर्ट और सिविल कोर्ट में भी वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों पर अपील की जा सकेगी।

संसद में विधेयक पर गरमागरम बहस

लोकसभा में इस विधेयक को पेश करते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, यदि यह विधेयक पास नहीं होता तो संसद भवन तक पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था। विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए इसे संविधान के मूल ढांचे पर हमला बताया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है, जबकि AIMPLB (ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड) ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

अल्पसंख्यक मामले के मंत्री किरेन रिजिजू ने बताई बिल की अहम बातें

  •  सेंट्रलाइज डेटा बेस होगा, वेबसाइट होगी। ट्रैकिंग होगी, काम वक्त पर होगा, करेक्शन करेंगे, ऑडिट भी होगा। लैंड (जमीन) राज्य का विषय है। राज्य सरकारों को पूरी अथॉरिटी मिलेगी। राज्य सरकारें ही पूरी तरह से इसकी निगरानी का काम करेंगी।
  • वक्फ धार्मिक, चैरिटेबल मकसद के लिए बनाया जाता है। इनकम हो रही है कि नहीं, यह भी देखेंगे। दरगाहों, मस्जिदों के इमामों ने सुझाव दिए हैं। हमने उन्हें रिकॉर्ड में रखा है।
  • जो प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड हो चुकी है, जहां आप नमाज पढ़ते हैं, उस पर कोई दखलंदाजी नहीं होगी। ये किसी के अधिकारों का हनन कर प्रॉपर्टी छीनने का कानून नहीं है।
  • कोर्ट में जिन प्रॉपर्टी पर विवाद चल रहा है, उस पर भी कुछ नहीं होगा।
  • कलेक्टर से ऊपर कोई भी अधिकारी सरकारी जमीन और किसी विवादित जमीन का विवाद देखेगा।
  • वक्फ ट्रिब्यूनल में 3 मेंबर होंगे। इसके केस जल्द खत्म किए जाएं। इनका कार्यकाल होगा। अगर वक्फ के ट्रिब्यूनल के फैसले से खुश नहीं हैं तो अदालत जा सकते हैं।
  • जब वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट करेंगे तो किसी आदिवासी एरिया में जाकर नहीं कर सकते।
  • वक्फ बोर्ड जो कॉन्ट्रिब्यूशन देते हैं तो मुतावली पहले 7 फीसदी देते थे, अब उसे 5 फीसदी कर दिया गया है।
  • कोई भी मुसलमान जब वक्फ क्रिएट करता है तो सबसे पहले महिला का अधिकार सुरक्षित करना होगा।

क्या यह विधेयक मुस्लिम समाज के लिए फायदेमंद होगा?

विधेयक समर्थकों का मानना है कि यह वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और इनका उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है। दूसरी ओर, इसके विरोधियों का कहना है कि इससे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता प्रभावित होगी और मुस्लिम समाज की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ जाएगा।

विधेयक के समर्थन और विरोध के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि इसे लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और इसका असर देश के विभिन्न हिस्सों में कैसा रहता है।

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