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डीएसपी बनते ही ‘हिमानी’ को दिल, दे बैठे, तब से आज तक ‘विनीत’ हैं

डीएसपी बनते ही ‘हिमानी’ को दिल, दे बैठे, तब से आज तक ‘विनीत’ हैं

विजय एस गौर-भोपाल। वर्ष 2006 बैच के मध्यप्रदेश कॉडर के आईपीएस अधिकारी विनीत खन्ना ने पुलिस में अपना सफर डीएसपी पद से प्रारंभ किया और पुलिस महानिरीक्षक पद तक पहुंचने के बाद अपने बुजुर्ग पिता की सेवा का संकल्प लेकर हाल ही में वीआरएस ले लिया। हालांकि उनकी संगनी हिमानी खन्ना आईजी के पद पर रहते हुए जन सेवा में लगी हुई हैं। ‘विनीत’ जैसा कि नाम है, कभी-कभी इसके विपरीत भी चले जाते हैं।

यह पता चलता है, उनके बचपन के व्यवहार से जब स्कूल में शैतानी करने पर उनके प्रोफेसर पिता ने शिकायत मिलने पर खासी पिटाई की थी। पिता की पिटाई से सबक लिया और जन सेवा के लिए पुलिस में आ गए लेकिन उनका ‘दिल’ किसी और के लिए धड़क रहा था। लिहाजा उनकी जिंदगी में हिमानी जैन आ गईं। आज नए अंदाज में प्रस्तुत है ‘पीपुल्स समाचार के साथ’ कॉलम में आईपीएस विनीत खन्ना से बातचीत के प्रमुख अंश:-

‘तकरार में हिमानी का पक्ष लेते हैं मां-पिताजी’

  • जैसे की आपका नाम विनीत है, क्या स्कूल में ऐसे ही थे?
  • जवाब: मेरे पिता ने मेरा नाम विनीत रखा था, लेकिन स्कूल में शैतानी बराबर करता। एक दिन मेरी शिकायत प्रोफेसर पिता के पास पहुंच ही गई। तब, ऐसी पिटाई हुई कि शैतानी भूल गया।
  • कॉलेज लाइफ कैसी बीती?
  • जवाब: शरीफ इसलिए भी रहना पड़ा कि राजनांदगांव के जिस कॉलेज में पढ़ता था, उसी कॉलेज में पिता एसआर खन्ना प्रोफेसर थे।
  • युवा अवस्था में किसी पर दिल आया?
  • जवाब: क्यों नहीं? जैसे ही डीएसपी पद पर सिलेक्ट हुआ और ट्रेनिंग में पहुंचा। वहां मुझे हिमानी जैन मिलीं, हमने-एक दूसरे को देखा और जीवन भर साथ रहने की कसमें खा लीं। वैसे प्रपोज मैंने ही किया था।
  • पति खन्ना, पत्नी जैन। समाज को लेकर कभी अड़चन आई?
  • जवाब: मेरे एक रिश्तेदार को जब मेरी शादी के बारे में पता चला तो मुझसे मिलने आए और बोले अरे कहां जैन के चक्कर में पड़ रहा है, तेरी शादी तो पंजाबियों में कराएंगे..अच्छा पैसा मिलेगा। मैंने उनको दो टूक जवाब दिया कि यह हम दोनों की जिंदगी का मैटर है, बीच में ना पडे। ऐसे कई प्रपोजल तब थे, लेकिन फाइनल तो हिमानी को ही जैन से खन्ना बनने आना था।
  • पिता प्रोफेसर और आप पुलिस सेवा में ?
  • जवाब: तब सोच थी कि पिताजी तो प्रोफेसर हैं हीं। राजनांदगांव में पीएससी की तैयारी हो सकती थी, तैयारी की और सिलेक्ट हो गया।
  • ऑफिस के किसी दबाव या उलझन को एक-दूसरे से डिस्कस करते हों?
  • जवाब: कभी नहीं, हमारे घर तक हमारा ऑफिस नहीं पहुंच पाया।
  • घर के काम में कितना हाथ बंटाते हैं?
  • जवाब: हमारे काम बंटे हैं। 80 परसेंट फैसले दोनों की सहमति से होते हैं बाकी हिमानी ही फाइनल करती हैं।
  • पति और पत्नी के बीच तकरार होने पर बात कहां तक पहुंचती है?
  • जवाब: वैसे तो तकरार होती नहीं और अगर नोंक-झोक हो जाए, तो मां और पिता जी हिमानी को सही ठहरा कर मुझे साइलेंट करवा देते हैं।
People's Reporter
By People's Reporter

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